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CG News: लाल किले पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति का रंग, स्वाद और परंपराओं ने लूटा दिल

Thu, 29 Jan 2026 06:27 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

गणतंत्र दिवस समारोहों के अंतर्गत लाल किले के सामने लॉन और ज्ञान पथ पर आयोजित भारत पर्व 2026 में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक झलक दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन गई है।
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लाल क़िले पर छत्तीसगढ़ के स्वाद और लोक परंपराओं का उत्सव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गणतंत्र दिवस समारोहों के अंतर्गत लाल किले के सामने लॉन और ज्ञान पथ पर आयोजित भारत पर्व 2026 में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक झलक दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन गई है। छह दिवसीय इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन महोत्सव में छत्तीसगढ़ की लोक कला, पारंपरिक व्यंजन और पर्यटन पवेलियन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
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भारत पर्व में छत्तीसगढ़ के कलाकार पंथी सहित अन्य पारंपरिक लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दे रहे हैं। रंग-बिरंगे परिधान, जोशीले कदम और जनजातीय ताल दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर रहे हैं। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह दोगुना हो रहा है।

छत्तीसगढ़ के फूड स्टॉल भी लोगों के बीच खासे लोकप्रिय बने हुए हैं। चिला, ठेठरी, खुरमी और फरा जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए दिनभर भीड़ लगी रहती है। कई लोग पहली बार छत्तीसगढ़ी भोजन का स्वाद चख रहे हैं और इसके स्वाद व सादगी की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।
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पर्यटन पवेलियन में राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, त्योहारों और प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी दी जा रही है। यहां चित्रकोट जलप्रपात, बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य और सिरपुर जैसे स्थलों को लेकर पर्यटकों में खास उत्सुकता देखी जा रही है। लोग यात्रा मार्ग, ईको-टूरिज्म और होमस्टे सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं।

इसके साथ ही भारत पर्व में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल छत्तीसगढ़ की झांकी को भी प्रदर्शित किया गया है। डिजिटल जनजातीय संग्रहालय की अवधारणा पर आधारित यह झांकी अपनी कलात्मकता और संदेश के कारण दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लोग झांकी के साथ तस्वीरें खिंचवाते हुए छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत और इतिहास की सराहना कर रहे हैं।

31 जनवरी को समापन होने वाला भारत पर्व 2026 देश की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत मंच बनकर सामने आया है, जहां विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं, पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प, संगीत और क्षेत्रीय व्यंजन एक साथ देखने को मिल रहे हैं।
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