केंद्रिय विवि के एक प्रोफेसर को अदालत ने अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में दस साल की कैद और दो सौ रूपये जुर्माने की सजा सुनाई है। प्रोफेसर की पत्नी ने वर्ष 2013 में घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। दोनों का प्रेम विवाह हुआ था। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में हुई।
16 मई 2013 को केंद्रिय विवि में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात हीरालाल यादव ने रायपुर निवासी आशा यादव से प्रेम विवाह किया। शादी के कुछ दिन बाद ही दोनों के बीच अनबन होने लगी। पती-पत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया और 26 जुलाई 2013 को आशा पति का घर छोड़कर अपने मायके चली गई। एक दिन बाद उनके पति प्रोफेसर हीरालाल यादव ने आशा को फोन किया और घर आने को कहा।
28 जुलाई 2013 को आशा घर वापस लौटी। उस रात दोनों के बीच किसी बात को लेकर फिर विवाद हो गया। आशा ने गुस्से में आकर कोनी स्थित आवास में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रोफेसर यादव ने इसकी सूचना कोनी थाने में दी। आशा के परिजनों ने प्रोफेसर यादव पर अपनी बेटी की हत्या करने का आरोप लगाया और बाद में पुलिस ने प्रोफेसर के खिलाफ 302 और 201 का मामला दर्ज किया।
अदालत ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए प्रोफेसर यादव को धारा 306 के तहत दोषी करार देते हुए दस साल सश्रम कारावास और दो सौ रूपए जुर्माने की सजा सुनाई।