छत्तीसगढ़ के सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र कुमार दुग्गा ने सूरजपुर जिले के बिहारपुर क्षेत्र में पदस्थ नायब तहसीलदार एवं प्रभारी तहसीलदार करमचंद जाटवर को पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही और उदासीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कुबेरपुर गांव में सड़क हादसे के बाद उपजे भारी बवाल, आगजनी और कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति में प्रशासनिक तत्परता न दिखाने पर की गई है। निलंबन अवधि में प्रभारी तहसीलदार करमचंद जाटवर का मुख्यालय संभागीय पटवारी प्रशिक्षण शाला, अम्बिकापुर, जिला सरगुजा निर्धारित किया गया है।
चांदनी बिहारपुर के ग्राम कुबेरपुर में 17 अक्तूबर को एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ने स्कूटी सवार 28 वर्षीया महिला चंद्रवती जायसवाल को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर घंटों चक्काजाम किया। शाम होते-होते स्थिति अधिक तनावपूर्ण हो गई और उग्र भीड़ ने दुर्घटनाकारित ट्रैक्टर के साथ एक क्रशर प्लांट में आग लगा दी। उपद्रव के दौरान ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को भी घंटों तक बंधक बनाए रखा। इस मामले में पुलिस ने उपद्रव करने वाले 26 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है तथा छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
स्थिति का जायजा लेने पहुंची राज्य की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। साथ ही उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पुलिस द्वारा की जा रही एकतरफा कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हादसा दोपहर 12 बजे हुआ था, तो शाम 7 बजे तक प्रशासन क्या कर रहा था। मंत्री ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कड़ी कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
मंत्री के निर्देशों के बाद सूरजपुर कलेक्टर ने मामले की गहन जांच कराई। कलेक्टर द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में चांदनी बिहारपुर के प्रभारी तहसीलदार करमचंद जाटवर की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर अत्यंत गंभीर सवाल सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, 17 अक्तूबर को कुबेरपुर में दुर्घटना के पश्चात संवेदनशील माहौल बन गया था। ऐसे संकट के समय स्थानीय प्रशासन से त्वरित सक्रियता और जिम्मेदारी की अपेक्षा थी, परंतु प्रभारी तहसीलदार ने स्थिति को संभालने में कोई तत्परता नहीं दिखाई। उनके इस रवैये को पदीय कर्तव्यों के प्रति गंभीर उदासीनता माना गया। कलेक्टर के जांच प्रतिवेदन के आधार पर सरगुजा कमिश्नर ने निलंबन की कार्रवाई की।