राजधानी में सप्रे मैदान में धरना कर रहे शिक्षाकर्मियों ने सरकार की पेशकश को ठुकरा दिया है। संविलियन और छठवें वेतनमान की मांग कर रहे शिक्षाकर्मियों ने संयुक्त शिक्षा पंचायत मोर्चा के बैनर तले सचिव स्तरीय चर्चा में भाग लिया। इसमें राज्य सरकार की ओर से प्रमुख सचिव विवेक टांडा ने शिक्षाकर्मियों को साफ-साफ कह दिया कि संविलियन की बात न करें।
विवेक टांडा ने 12 से 14 वर्ष की सेवा दे शिक्षाकर्मियों को छठवां वेतनमान की पेशकश की, इसे शिक्षाकर्मियों ने खारिज कर दिया। उनका कहना है कि इससे केवल दो फीसदी शिक्षाकर्मियों को ही फायदा होगा। एक हिंदी दैनिक के अनुसार अनशनकारियों का कहना है कि शिक्षा कर्मियों से सरकार सकारात्मक चर्चा के लिए सचिव स्तरीय वार्ता के बजाय सीधे मंत्री स्तरीय उपसमिति से चर्चा कराए।
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने खुद शिक्षाकर्मियों के संविलियन की घोषणा की थी, इसलिए सीधे उन्हें इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। वहीं, तीन दिसंबर से प्रदर्शन कर रहे हड़तालियों ने जल सत्याग्रह भी शुरू कर दिया। 21 हड़तालियों ने जल सत्याग्रह कर शासन को सद्बुद्घि देने की प्रार्थना भी की।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन ने भी शिक्षाकर्मियों की हड़ताल का समर्थन किया है। संगठन की छत्तीसगढ़ प्रदेश कमेटी ने राज्य सरकार से शिक्षाकर्मियों की दो सूत्रीय मांग को तत्काल पूरा करने की मांग की है। साथ ही शिक्षाकर्मियों की बर्खास्तगी का विरोध करते हुए बर्खास्तगी के निर्देश को भी वापस लेने के लिए कहा है।