वर्ष 2025-26 में अब तक 11 लाख 56 हजार 970 लोगों का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान 3,925 मोतियाबिंद मरीजों की पहचान हुई, जिनमें 314 दोनों आंखों से, 3,604 एक आंख से और 7 बच्चे जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित पाए गए।
राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत रायगढ़ जिले में वर्ष 2025-26 में अब तक 11 लाख 56 हजार 970 लोगों का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान 3,925 मोतियाबिंद मरीजों की पहचान हुई, जिनमें 314 दोनों आंखों से, 3,604 एक आंख से और 7 बच्चे जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित पाए गए। जुलाई 2025 तक 1,002 मरीजों के सफल ऑपरेशन किए गए, जिनमें 183 दोनों आंखों के, 815 एक आंख के और 4 जन्मजात मोतियाबिंद के बच्चे शामिल थे।
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दूरस्थ अंचलों में दृष्टि सुधार के लिए विशेष शिविर आयोजित किए गए। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए यूनिक आईडी कार्ड और दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए गए। बाकारूमा और घरघोड़ा के बच्चों के माता-पिता को ऑपरेशन के लिए प्रेरित किया गया, जिससे उनके बच्चों की आंखों की ज्योति लौट आई।
स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के तहत जुलाई माह तक 136 शासकीय माध्यमिक विद्यालयों के 6,586 विद्यार्थियों का नेत्र परीक्षण किया गया। इनमें 318 बच्चे दृष्टिदोष से पीड़ित पाए गए और उन्हें निःशुल्क चश्मे प्रदान किए गए। कार्यक्रम के तहत दूरस्थ विकासखंडों, जनजातीय और पिछड़े क्षेत्रों के बच्चों का विशेष परीक्षण किया गया। इनमें ग्राम सूपकोना के 13 वर्षीय अनूप प्रकाश राठिया, रैरूमाखुर्द की 6 वर्षीय पूर्णिमा राठिया, ग्राम बटूराकछार के 11 वर्षीय परदेशी यादव और कबीर चौक की 13 वर्षीय दृष्टि राय का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन हुआ, जिसके बाद वे सामान्य रूप से देख पा रहे हैं और अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं।
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माता-पिता ने कहा कि यह केवल इलाज नहीं, बल्कि बच्चों को नया जीवन देने जैसा है। रायगढ़ जिले में संवेदनशील नेतृत्व और टीमवर्क के कारण हजारों लोगों की जिंदगी में फिर से उजाला लौटा है। वर्ष 2024-25 में मोतियाबिंद ऑपरेशन के क्षेत्र में जिला चिकित्सालय रायगढ़ को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला था और रायगढ़ को राज्य के 11 मोतियाबिंद फ्री जिलों में शामिल किया गया था।