छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की समस्या जस की तस बनी हुई है, जिसे लेकर राज्य सरकार आर या पार की लड़ाई करने का मन बना चुकी है। 15 सालों में पहली बार मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने महिला आरक्षकों की दीक्षांत परेड में बोलते हुए कहा कि नक्सली या तो सरकार के आगे सरेंडर करें या मरने के लिए तैयार हो जायें।
इस तरह की भाषा का इस्तेमाल मुख्यमंत्री ने अपने पूरे कार्यकाल में पहली बार किया है जिसे बेहद अहम माना जा रहा है। सीएम ने दो में टूक कहा कि सरगुजा की तर्ज पर बस्तर में भी बड़ा ऑपरेशन चलाया जायगा जिससे नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जायेगा। उन्होंने ये भी साफ किया की अब बीच का रास्ता बंद हो चुका है। यानि नक्सलियों और सरकार के बीच बातचीत कर समाधान निकालने का विकल्प भी कत्म हो चुका है।
छत्तीसगढ़ के मुखिया ने ऐलान किया कि नक्सली सरेंडर करें वरना फोर्स उन्हें जड़ से खत्म करने के लिए तैयार है। अपनी सरकार की मंशा माफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक आखिरी नक्सली सरेंडर नहीं करता या मारा नहीं जाता तब तक ऑपरेशन आक्रामकता से जारी रहेगा। 2003 में सरकार की बागडोर पहली बार सम्हालने के बाद से ही रमन सरकार नक्सलियों के हमले झेलती रही है।
राज्य महिला आरक्षकों की दीक्षांत परेड में बोलते हुए सीएम ने नक्सलवाद के सम्पूर्ण खात्मे में स्थानीय लोगों की मदद को सबसे जरूरी बताया और आदिवासियों से भी आगे आने का आह्वान किया। नव आरक्षकों में कुल नए 526 आरक्षक हैं,जिसमें इस बार महिला आरक्षकों की संख्या 194 है।
दीक्षांत समारोह को सीएम ने ऐतिहासिक मौका बताया क्योंकि पहली बार महिला आरक्षक सशस्त्र सेना में शामिल हो रहीं हैं। जिसमें से 75 फीसदी उसी बस्तर इलाके की हैं जो सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने दीक्षांत परेड की सलामी ली जहां डीजीपी एएन उपाध्याय सहित अन्य अफसर भी मौजूद थे।
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में माओवादियों ने कई बड़े हमले किए हैं जिसमे सुरक्षा बलों के साथ लोगों की भी जान गई है। हालांकि सरकार पहले ही दिन से नक्सलियों के खात्मे पर जोर देती रही है पर बस्तर में सरकार को बड़ी सफलता नहीं मिली है। इस समस्या को खत्म करने के लिए माओवादियों को बातचीत का निमंत्रण भी रमन सरकार देती रही लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। बतौर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपनी सरकार में राज्य सुरक्षा बल में लगातार वृद्धि की है।
गौरतलब है कि इस साल के अंत में होने वाले मध्यप्रदेश और छतितीसगढ के चुनाव में नक्सलियों के मसले को विरोधी दल खूब उठा रहे हैं और सरकार को विफल बता रहे हैं। तो ऐसे में मुख्यमंत्री रमन सिंह का नक्सलियों को धमकाना लाजमी है ताकि उनके वोट बैेक में इस वजह से कमी ना आये।