कोण्डागांव-बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर अब देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुँचने को तैयार है। कोण्डागाँव वनमंडलाधिकारी चूड़ामणी सिंह की पहल पर जिले के मर्दापाल और परोदा क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म सर्किट का विकास प्रस्तावित है। इस सर्किट का उद्देश्य है नक्सलवाद से मुक्त हुए बस्तर के अनछुए और खूबसूरत इलाकों को पर्यटन के नए मानचित्र पर लाना, जिससे स्थानीय आदिवासी समुदायों को स्थायी रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण मिल सके।
इस ईको-टूरिज्म सर्किट की शुरुआत केशकाल के प्रसिद्ध टाटामारी व्यू प्वाइंट से होगी, जहां पर्यटक सूर्योदय का अद्भुत नजारा देख सकेंगे। इसके बाद सैलानी मर्दापाल के देवगुड़ी दरबार पहुंचेंगे, जहां बस्तर के 41 परगनों की पारंपरिक आस्था स्थलों की प्रतिकृतियां स्थापित की जाएंगी। यहां बटरफ्लाई पार्क, औषधीय उद्यान, चिल्ड्रन पार्क, फलदार वृक्ष क्षेत्र और व्हाइट वॉटर रिवर राफ्टिंग जैसी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं।
मर्दापाल से करीब 20 किलोमीटर दूर पुसपाल वैली व्यू प्वाइंट को सूर्यास्त देखने के लिए विकसित किया जा रहा है। यहां पहाड़ी की चोटी पर लकड़ी और मिट्टी से बने ईको कॉटेज, वॉच टावर, नाइट कैंपिंग जोन और स्टार-गैजिंग प्वाइंट पर्यटकों को प्राकृतिक अनुभव देंगे। इस स्थल से महज 2.5 किलोमीटर की दूरी पर बहती इंद्रावती नदी में भी रिवर राफ्टिंग की योजना है।
वनमंडल के प्रस्ताव के अनुसार, मर्दापाल ईको जोन में लगभग ₹610 लाख और परोदा वैली व्यू प्वाइंट पर ₹152 लाख की लागत से विकास कार्य होंगे। इस परियोजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और नक्सलमुक्त बस्तर के शांत, सुंदर और सांस्कृतिक रूप को देश के सामने लाने का अवसर मिलेगा।
ईको-टूरिज्म सर्किट के पूर्ण होने पर पर्यटक टाटामारी में सूर्योदय और पुसपाल घाटी में सूर्यास्त का आनंद लेते हुए चित्रकूट जलप्रपात और कांगेर घाटी नेशनल पार्क तक की यात्रा कर सकेंगे यह सर्किट न सिर्फ पर्यटन बल्कि विकास और विश्वास की नई राह बनेगा।