सुकमा में शबरी नदी का जलस्तर बढ़ने से 22 गांवों के 30,114 लोग प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की और राहत सामग्री वितरित की। प्रशासन को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। मकानों, फसलों और जनहानि का सर्वे कर मुआवजा देने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शबरी नदी का जलस्तर घटने के बाद जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। उन्होंने राजवाड़ा सड़क और वार्ड संख्या 12 में जाकर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को सूखा राशन और कपड़े भी प्रदान किए। प्रशासन ने उन्हें जिले में बाढ़ से बने हालात की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को सभी प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए।
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बाढ़ से जनजीवन प्रभावित
जिले में भारी वर्षा के कारण शबरी नदी के उफान पर आने से निचले क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते 22 गांवों के 30,114 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। शबरी नदी का जलस्तर बढ़ने से सुकमा के कई इलाकों में पानी भर गया। बाढ़ की चपेट में आने से एक व्यक्ति की जान चली गई। वहीं 10 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए और 310 मकानों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों को सुरक्षित निकालते हुए निकटतम विद्यालयों और राहत शिविरों में ठहराया है। इन शिविरों में प्रभावितों के लिए शुद्ध पेयजल, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर डालने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
नुकसान का विस्तृत सर्वे जारी
बाढ़ का पानी कम होने के बाद लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। हालांकि घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान और जरूरी सामग्री खराब हो गई है, जिससे लोगों के सामने दैनिक जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कठिन चुनौती खड़ी हो गई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासन बाढ़ के कारण हुए मकानों, फसलों और जनहानि का विस्तृत सर्वे करा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे प्रक्रिया पूरी होते ही नियमानुसार प्रत्येक पीड़ित को उचित मुआवजा दिया जाएगा। सरकार प्रत्येक प्रभावित नागरिक के साथ मजबूती से खड़ी है और राहत कार्यों की समीक्षा कर रही है।
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पोलावरम परियोजना पर रुख
पोलावरम बांध के कारण कोंटा क्षेत्र के गांवों के जलमग्न होने की आशंका पर मुख्यमंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विस्थापन से पूर्व लोगों को स्थापित करने की नीति पर काम कर रही है। नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नए सर्वे के अनुसार डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों की संख्या 18 से अधिक भी हो सकती है। सरकार पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।