जन्म के साथ ही सिर का आकार बढ़ने की बीमारी के लक्षण बस्तर जिले के अंदुरुनी इलाकों में काफी देखने को मिलते हैं। इसका इलाज कराने के लिए राजधानी रायपुर में लाखों रुपये खर्च हो सकते थे। वहीं, मेकाज के न्यूरोसर्जन ने इस इलाज को निशुल्क करते हुए तीन बच्चों को नई जिंदगी दी। इसके बाद इन बच्चों का सामान्य तौर पर शरीर विकसित होने लगेगा।
न्यूरोसर्जन डॉक्टर पवन बृज ने कहा कि इस तरह से बच्चों के सिर बढ़ने को हाइड्रोसिफेलस कहा जाता है। इन बच्चों में दो बालक व एक नौ साल की बच्ची भी थी। इस ऑपरेशन में एनथीसिया विभाग के डॉक्टरों के साथ ही सर्जरी विभाग के डॉक्टर ने भी अहम भूमिका निभाई। सुकमा जिले के गांव से तीन बच्चों के सिर का आकार बढ़ गया। उन्हें इलाज के मेकाज लाया गया था, जहाँ न्यूरोसर्जन डॉक्टर पवन बृज के द्वारा वार्ड में भर्ती किया गया। लगातार उपचार के बाद उनका ऑपरेशन किया गया।
नवजात बच्चों के जन्म के साथ ही सामान्य रूप से सिर का आकार न होकर अचानक से बढ़ने के कारण उनका ऑपरेशन किया जाता है। इस ऑपरेशन को करने के लिए बच्चों के सिर में एक पाइप को सिर के माध्यम डाला जाता है, जो पेट में रखा जाता है। इस प्रक्रिया के बाद बच्चों के सिर का आकार फिर सामान्य तौर पर बढ़ने लगता है।