इधर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़(जे) ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह स्वयं संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच करे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा कि कनक तिवारी का स्पष्ट कहना है कि जब उन्होंने इस्तीफा दिया ही नहीं, तो मुख्यमंत्री ने उसे कैसे मंजूर कर लिया और रातों-रात नए महाधिवक्ता की नियुक्ति भी कर दी।
जोगी ने कहा कि कनक तिवारी के इस कथन से राज्य पर संवैधानिक संकट छा गया है। महाधिवक्ता जैसे संवैधानिक पद के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ करना मुख्यमंत्री को बिलकुल शोभा नहीं देता है। उन्होंने कहा है कि आखिर क्या कारण है कि कनक तिवारी जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता को इस तरह अपमानित करके बर्खास्त किया गया है।
मालूम हो कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद रमन सिंह सरकार के दौरान महाधिवक्ता रहे जुगल किशोर गिल्डा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता कनक तिवारी को महाधिवक्ता नियुक्त किया था, लेकिन राज्य सरकार ने अब तिवारी को हटाकर वर्मा को महाधिवक्ता नियुक्त कर दिया है।
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