कोंडागांव के मर्दापाल में श्रीराम फाइनेंस पर बिना नोटिस ग्रामीणों के वाहन जब्त करने का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और दमनकारी वसूली नीति की शिकायत की।
श्रीराम फाइनेंस कंपनी पर मर्दापाल क्षेत्र में ग्रामीणों के वाहन बिना नोटिस जब्त करने और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ितों का दावा है कि केवल 11 दिन की किस्त देरी पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उनके दोपहिया वाहन जबरन उठा लिए गए।
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मेढ़पाल निवासी अंगत राम की एचएफ डीलक्स बाइक, हंगवा निवासी धनीराम कोर्राम और नवागांव निवासी केदारनाथ पोयाम की बेटी दामेंद्री पोयाम का होंडा एक्टिवा श्रीराम फाइनेंस ने जब्त कर लिया। पीड़ितों का कहना है कि कंपनी कम डाउन पेमेंट पर वाहन देकर ग्रामीणों को भारी-भरकम किश्तों में फंसाती है और मामूली देरी पर बिना नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के वाहन जब्त कर लेती है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के आईसीआईसीआई बैंक बनाम शांति देवी शर्मा मामले में स्पष्ट किया था कि कोई भी फाइनेंस कंपनी केवल विधिक प्रक्रिया के तहत ही संपत्ति जब्त कर सकती है। जबरन वाहन जब्ती संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी वसूली के लिए डराने-धमकाने की नीतियों को गैरकानूनी घोषित किया है।
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इस घटना से ग्रामीणों में भारी रोष है और उन्होंने कंपनी की वसूली नीति को दमनकारी बताया। श्रीराम फाइनेंस के शाखा प्रबंधक विकास भदौरिया ने मीडिया के कॉल काट दिए, जबकि ब्रांच प्रभारी दीपंकर मीडिया को देखकर कार्यालय छोड़कर भाग गए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगा या यह शिकायत अनसुनी रह जाएगी।