छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में संचालित प्रोजेक्ट और केंद्र व राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों को पिछले चार से पांच महीने से वेतन नहीं मिला है। समय पर वेतन न मिलने के कारण इन कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। लगातार वेतन न मिलने और आर्थिक तंगी से परेशान होकर कई अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने अपनी नौकरियां छोड़ दी हैं। वेतन के अभाव और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की वजह से निकायों के महत्वपूर्ण विकास प्रोजेक्टों और सरकारी योजनाओं के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। नियमित सेवा में शामिल न होने वाले इन कर्मचारियों के सामने अब परिवार का पालन-पोषण करना कठिन हो गया है।
कर्मचारियों का गहराया संकट
नगरीय निकायों में केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं और विभिन्न विकास परियोजनाओं के तहत बड़ी संख्या में अधिकारी तथा कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से एक बड़ी संख्या नियमित सरकारी सेवा के अंतर्गत नहीं आती है। इन कर्मियों का वेतन संबंधित योजना, प्रोजेक्ट अथवा नगरीय निकाय के बजट और निर्धारित भुगतान प्रक्रिया पर पूरी तरह निर्भर रहता है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों के लंबित रहने और भुगतान की जटिल प्रक्रिया में देरी होने के कारण कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। वेतन भुगतान में हो रहे इस विलंब की वजह से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
लंबे समय से बनी हुई है वेतन में देरी
नगरीय निकायों में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि वेतन में देरी होने की यह समस्या नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से अलग-अलग नगरीय निकायों में अनियमित और प्रोजेक्ट आधारित कर्मचारियों को कभी दो तो कभी तीन महीने के अंतराल में वेतन मिलने की स्थिति बनती रही है। लंबे समय तक बिना वेतन काम करने में असमर्थ होने के कारण कई कर्मचारी नौकरी छोड़ने का कदम उठाने के लिए मजबूर हुए हैं। कर्मचारियों की संख्या कम होने से योजनाओं और प्रोजेक्ट से जुड़े कार्यों की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कर्मचारियों ने अधिकारियों और विभागीय स्तर पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं।
विभागीय मंत्री के निर्देशों के बाद भी स्थिति यथावत
सूत्रों के अनुसार समय पर वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित मंत्री की ओर से प्रशासनिक अधिकारियों को पूर्व में स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद भुगतान व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार नहीं हो पाया है। कर्मचारियों को हर कुछ महीनों में अपने बकाया वेतन के भुगतान के लिए संबंधित अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रशासनिक स्तर पर फाइलें अनावश्यक रूप से रुकी रहती हैं, जिससे कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रदेश में चार लाख से अधिक संविदा कर्मी परेशान
प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में चार लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी प्लेसमेंट तथा संविदा के आधार पर कार्यरत हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन भुगतान से जुड़ी फाइलें कई बार बेवजह लंबित रखी जाती हैं। कुछ कर्मियों ने अधिकारियों पर एजेंसियों से कमीशन प्राप्त करने के चक्कर में फाइलें अटकाने का गंभीर आरोप भी लगाया है। चार से पांच महीने तक वेतन न मिलने की स्थिति में कर्मचारियों को कर्ज लेकर घर का खर्च चलाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने मांग की है कि योजनाओं और प्रोजेक्टों में कार्यरत कर्मियों के लिए नियमित और समयबद्ध वेतन भुगतान की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि आर्थिक संकट दूर हो सके और शासकीय कार्य सुचारू रूप से चल सकें।