छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों के हमले से जनहानि होने पर अब पीड़ितों और उनके परिजनों को 12 लाख रुपये की दोगुनी क्षतिपूर्ति राशि मिलेगी। वन विभाग ने इस बढ़ोतरी का औपचारिक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही प्रभावित लोगों को नई दरों के अनुसार राशि का भुगतान किया जाएगा।
राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इस प्रस्ताव को अंतिम रूप प्रदान किया गया। पिछले कई वर्षों से क्षतिपूर्ति राशि में कोई इजाफा नहीं किया गया था, जिसके कारण वन विभाग ने वर्तमान स्थितियों की पुनर्समीक्षा की।
पड़ोसी राज्यों का अध्ययन
क्षतिपूर्ति राशि में वृद्धि का निर्णय लेने से पहले वन विभाग ने पड़ोसी राज्यों में दी जाने वाली सहायता राशि का अध्ययन किया। समीक्षा के दौरान पाया गया कि महाराष्ट्र में वन्यजीव हमले से मौत होने पर 20 लाख रुपये, कर्नाटक में 15 लाख रुपये और केरल में 10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि दी जा रही है।
इन तमाम व्यावहारिक पहलुओं और सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन को ध्यान में रखकर क्षतिपूर्ति में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के अनुसार वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप से चर्चा के बाद सहमति मिलते ही राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। इससे प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
अनुसूची एक के जीव शामिल
प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत शेड्यूल वन (अनुसूची एक) के तहत आने वाले वन्यजीवों को क्षतिपूर्ति के दायरे में रखा गया है। इसमें बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, भेड़िया, जंगली सूअर, गौर, जंगली हाथी, जंगली कुत्ता, मगरमच्छ, वन भैंसा, सियार और बंदर शामिल हैं।
इन चिह्नित वन्य प्राणियों द्वारा हमला करके लोगों को घायल करने, जान लेने या किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाने पर पीड़ितों को क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद प्रभावितों को राहत मिलेगी।