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CG News: फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन शुरू, धान, मक्का और सोयाबीन सहित 11 फसलें शामिल

Mon, 13 Jul 2026 07:49 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ में खरीफ मौसम 2026 के दौरान किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनिश्चितता से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन की प्रक्रिया 12 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ में खरीफ मौसम 2026 के दौरान किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनिश्चितता से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन की प्रक्रिया 12 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। राज्य के कृषि विभाग ने सभी पात्र किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 का इंतजार किए बिना समय पर अपनी फसलों का बीमा करा लें।
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मौसम विभाग के अनुसार, इस साल म्स छपदव (एल नीनो) के प्रभाव के कारण प्रदेश में अनियमित या कम बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसी स्थिति में संभावित नुकसान से बचने के लिए फसल बीमा किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा। योजना के तहत राज्य के किसान निम्नलिखित फसलों का बीमा करा सकते हैं। धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का और सोयाबीन, दलहन व तिलहन में अरहर, मूंगफली, मूंग, उड़द, मोटे अनाज (मिलेट्स) में कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों को अधिसूचित फसलों का बीमा करा सकते हैं। किसान अपने गांव में अधिसूचित फसल की सटीक जानकारी के लिए अपने क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

जिन किसानों ने कृषि ऋण लिया है, वे संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। जिन किसानों पर ऋण नहीं है, वे बैंक, वित्तीय संस्थान, लोक सेवा केंद्र, बीमा मध्यस्थों के जरिए या स्वयं सीधे भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मदद के लिए कृषि विभाग के मैदानी अमले का भी सहयोग लिया जा सकता है।
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राज्य सरकार ने किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इस बीमा योजना में चार प्रमुख चरणों के जोखिमों को शामिल किया है। बाधित बोनी (बुआई न हो पाना), रोपण में विफलता, स्थानीयकृत आपदाएं (ओलावृष्टि, जलभराव आदि) और फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान (उपज के आधार पर क्षति) पर मुआवजा मिल सकेगा।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी आपदा के कारण फसल को नुकसान पहुंचता है, तो किसानों को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देना अनिवार्य है। इसके लिए भारत सरकार के टोल-फ्री नंबर 14447 (कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन) पर कॉल किया जा सकता है। इसके अलावा किसान अपने क्षेत्रीय कृषि विभाग, राजस्व विभाग, संबंधित बैंक या बीमा कंपनी को भी तय समय सीमा में सूचित कर सकते हैं।
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