भाजपा की राज्य सरकारों और उनके मुख्यमंत्रियों पर आई आफत कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह के बाद भाजपा के सबसे 'नेक' मुख्यमंत्री माने जाने वाले छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह पर भी उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं।
नान घोटाले में तो उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग ही रहे थे अब कैग ने भी उनकी नीतियों पर उंगली उठा दी है। खासकर विधानसभा चुनावों से पूर्व निकाली गई विकास यात्राएं कैग के निशाने पर हैं जिसमें उन पर 9.58 करोड़ रुपए की अनयिमितता के आरोप लगाए गए हैं।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार रमन सिंह ने विकास मद की रकम को अपनी राजनीतिक विकास यात्राओं में खर्च कर डाला।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कैग द्वारा लोक निर्माण विभाग के (2013-14) के अभिलेखों की जांच के दौरान 2.33 करोड़ की अनियमितता सामने आई।
तंबू लगाने के लिए फूंक दिए 2.33 करोड़
जिसका उपयोग विकास यात्रा के दौरान तंबू लगाने और अन्य कार्यों में खर्च किया गया। जिसे बाद में सड़कों के निर्माण और सालाना मरम्मत और रखरखाव के खर्चे में दिखा दिया गया।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के जनसंपर्क विभाग ने 7.25 करोड़ रुपये आदिवासी क्षेत्रों में प्रचार प्रसार में खर्च कर दिए। विकास यात्रा के लिए अलग से कोई बजट नहीं रखा गया था इसलिए नियमित बजट से ही प्राप्त धन से विकास यात्रा का खर्चा उठाया गया।
राज्य की कैग रिपोर्ट में लोक निर्माण विभाग ने माना वहां जो भी खर्चे हुए थे उन्हें जनसंपर्क विभाग द्वारा भुगतान करने पर सही कर दिया जाएगा। जनसंपर्क विभाग ने बताया कि विकास यात्रा कोई स्थायी कार्यक्रम नहीं था जिसके लिए अलग से बजट रखा जाए या अलग से प्रस्ताव बनाया जाए।
निजी कंपनियों को भी पहुंचाया गया अनैतिक लाभ
कैग रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया है कि विकास यात्रा से जुड़ी विज्ञापन एजेंसी को भी उसके द्वारा पेशकश दर के अलावा अनैतिक लाभ दिया गया।
इसमें बताया गया कि जनसंपर्क विभाग ने कांसोल इंडिया कम्यूनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बिना किसी निविदा प्रक्रिया के द्वारा दिया गया 40.53 लाख का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार एड एजेंसी को एसएमएस और वाइस एसएमएस के जरिए लोगों तक संपर्क बनाना था लेकिन यहां यह भी ध्यान नहीं रखा गया कि उक्त कंपनी ने वास्तव में एसएमएस किए भी हैं या नहीं।
सरकार की सफाई को कैग ने नकारा
कैग रिपोर्ट के अनुसार इसी के सापेक्ष एक अन्य पेशकश डिजिटल स्क्रीन प्राइवेट लिमिटेड मुंबई द्वारा अप्रैल 2013 में दी गई थी। जिसमें मुख्यमंत्री की विकास यात्राओं के दौरान होने वाली आम सभाओं में ट्रक पर लगाए गए एलईडी से सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रचार किया जाना था।
रिपोर्ट में जनसंपर्क विभाग की इस बात के लिए खिंचाई की गई है कि उसने बिना किसी विधिवत निविदा प्रक्रिया के उक्त एजेंसी का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। इसके अलावा कंपनी को भुगतान के लिए खास शर्त रख दी गई। जिसकी वजह से यह संदिग्ध और अनियमित सौदा बन गई।
कैग ने सरकार की इस प्रतिक्रिया को स्वीकार करने से इंकार कर दिया कि एलईडी स्क्रीन लगे ट्रक का उपयोग विकास यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले लिया गया इसलिए इसमें निविदा प्रक्रिया आमंत्रित करने का समय नहीं बचा था।