फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रेस्ट टैक्स पोस्ट: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-पोस्ट पर प्राथमिकी क्यों? पुलिस गंभीर अपराधों पर ध्यान दे

Mon, 26 Oct 2026 08:58 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक 'ब्रेस्ट टैक्स' से जुड़ी फेसबुक पोस्ट पर दर्ज प्राथमिकी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता रूपनारायण एक्का की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ऐतिहासिक 'ब्रेस्ट टैक्स' से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में दर्ज प्राथमिकी पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस को इस प्रकार के प्रकरणों में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के बजाय गंभीर और बड़े अपराधों की जांच पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने जशपुर जिले के कुनकुरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रूपनारायण एक्का की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। इससे पहले छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आरोपी याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया था।

सोशल मीडिया पोस्ट और विवाद का कारण
यह मामला 13 अप्रैल, 2025 को फेसबुक पर साझा की गई पोस्ट से शुरू हुआ था। इस पोस्ट में ऐतिहासिक 'ब्रेस्ट टैक्स' का उल्लेख करते हुए दावा किया गया था कि महिलाओं के स्तन ढंकने पर लगाया जाने वाला यह कर मुगल शासक औरंगजेब ने नहीं, बल्कि एक ब्राह्मण ने लगाया था। पोस्ट सामने आने के बाद ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष दीपक मिश्रा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
विज्ञापन


शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस टिप्पणी के माध्यम से हिंदू महिलाओं तथा समुदाय के प्रति अनुचित बात कही गई है। इसके बाद कुनकुरी थाना पुलिस ने रूपनारायण एक्का के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 और धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया। धारा 299 धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए दुर्भावनापूर्ण कृत्य से संबंधित है, जबकि धारा 353(2) विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य या विद्वेष फैलाने वाली भ्रामक जानकारियों के प्रसार को रोकती है।

महज इतिहास से जुड़ा विचार, गलत भी संभव
उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि फेसबुक पोस्ट में केवल इतिहास से जुड़ी एक बात कही गई थी और यह अपने आप में कोई अपराध नहीं है। प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यह इतिहास से जुड़ा विचार था, जो गलत भी हो सकता है, लेकिन केवल ऐसी पोस्ट के आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होना चाहिए। इस तर्क पर न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने कहा कि इसी बिंदु के कारण अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है।

समय बर्बाद करने के लिए बहुत समय उपलब्ध
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने यह भी टिप्पणी की कि लोगों के पास समय बर्बाद करने के लिए बहुत समय उपलब्ध है। वहीं पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति आर. महादेवन ने सवाल उठाया कि इस प्रकार की पोस्ट के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को बड़े और गंभीर मामलों पर ध्यान देना चाहिए।

उच्च न्यायालय का निर्णय और अगली सुनवाई
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद रूपनारायण एक्का ने गिरफ्तारी से बचने के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। हालांकि उच्च न्यायालय ने 15 दिसंबर, 2025 को उनकी पहली याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद दायर की गई दूसरी याचिका भी उच्च न्यायालय ने 3 जुलाई, 2026 को निरस्त कर दी। उच्च न्यायालय से राहत न मिलने पर याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को याचिका पर नोटिस जारी करते हुए जांच में सहयोग की शर्त पर आरोपी के खिलाफ किसी भी कठोर कार्रवाई पर रोक लगाने का अंतरिम निर्देश दिया था।

पुलिस के बुलाए जाने पर पेश होना होगा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने पीठ को बताया कि नौ सितंबर को नोटिस जारी होने के बावजूद आरोपी थाने में पेश नहीं हुआ है। इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर वह पेश होंगे। राज्य सरकार के वकील ने बताया कि उन्हें उपस्थित होने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने राज्य सरकार द्वारा मामले में जवाब दाखिल न करने पर भी सवाल उठाया। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई चार दिसंबर को होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें