छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब यह औपचारिक रूप से कानून बन गया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही राज्य में नया कानून लागू हो गया है, जिससे धर्मांतरण से जुड़े मामलों में सख्ती बढ़ गई है।
छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब यह औपचारिक रूप से कानून बन गया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही राज्य में नया कानून लागू हो गया है, जिससे धर्मांतरण से जुड़े मामलों में सख्ती बढ़ गई है। इससे पहले प्रदेश में 1968 का कानून लागू था, जिसे अब नए प्रावधानों से प्रतिस्थापित किया गया है।
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नए कानून में अवैध धर्मांतरण को लेकर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 से 10 साल तक की सजा और जुर्माना भुगतना होगा। वहीं सामूहिक धर्मांतरण या विशेष श्रेणी के लोगों (महिला, नाबालिग, एससी/एसटी) के मामलों में सजा और भी कड़ी रखी गई है, जो 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है।
कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धर्मांतरण की प्रक्रिया को नियंत्रित और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके तहत धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति को अधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना अनिवार्य होगा। आवेदन के बाद उसकी सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। जांच पूरी होने के बाद ही धर्म परिवर्तन को वैध माना जाएगा।
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इसके अलावा, धर्मांतरण कराने वाले संस्थानों और व्यक्तियों के लिए पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। उन्हें हर साल विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी होगी। ग्रामसभा की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, ताकि स्थानीय स्तर पर निगरानी बनी रहे।
कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल विवाह के आधार पर धर्म परिवर्तन मान्य नहीं होगा। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म में वापस लौटता है, तो उसे धर्मांतरण की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।