ईसाई आदिवासी महासभा के बैनर तले आज कुनकुरी में "छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026" के विरोध में एक बड़ी रैली और आमसभा आयोजित की गई। कार्यक्रम के बाद राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन एसडीएम कुनकुरी को सौंपा गया। आयोजकों ने दावा किया कि इस विरोध प्रदर्शन में बीस हजार से अधिक लोग शामिल हुए।
सुबह करीब दस बजे से ही ईसाई समुदाय के लोग शहर में जुटने लगे थे। दोपहर बारह बजे तक भीड़ बीस हजार के पार पहुंच गई थी। खेल मैदान में जगह कम पड़ने पर करीब साढ़े दस बजे रैली निकाली गई। यह रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए वापस मैदान पहुंची।
आयोजकों का कहना है कि कुनकुरी खेल मैदान में इतनी बड़ी भीड़ पहले कभी नहीं देखी गई थी। जिले के लगभग हर ईसाई परिवार से लोग इसमें शामिल हुए। इस आंदोलन में जशपुर ईसाई धर्मप्रान्त के बिशप इमानुएल केरकेट्टा केंद्रीय कैथोलिक सभा के संरक्षक के रूप में शामिल हुए। ईसाई आदिवासी सभा के जिलाध्यक्ष वाल्टर कुजूर ने विधेयक को "काला कानून" बताया। उन्होंने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
रैली के दौरान शहर में यातायात भी प्रभावित हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग पर होलीक्रॉस अस्पताल तिराहे के पास करीब आधे घंटे तक जाम रहा। इसमें एक एंबुलेंस और कई परीक्षार्थी फंस गए थे। वाल्टर कुजूर ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाया। वक्ताओं ने विधेयक को धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया और मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए।
आयोजकों ने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को जशपुर शहर में भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। यह आंदोलन भी "छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026" के विरोध में होगा। रैली और सभा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी।