ईडी ने आरोप लगाया है कि अनवर ढेबर के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बेची जाने वाली शराब की "हर" बोतल से "अवैध रूप से" धन एकत्र किया गया था और भ्रष्टाचार और 2,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत थे। मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला 2022 के आयकर विभाग के चार्जशीट से सामने आया है, जो राज्य के आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और अन्य के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में दायर किया गया था।
छत्तीसगढ़ में कथित दो हजार करोड़ के शराब घोटाले के मामले में शराब कारोबारी पप्पू ढिल्लन को कोर्ट ने चार दिन की रिमांड पर भेज दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने गुरुवार को भिलाई से शराब कारोबारी पप्पू ढिल्लन को गिरफ्तार किया है। टीम ने उसे लेकर रायपुर पहुंची और कोर्ट में पेश किया है। वहीं मेयर एजाज ढेबर के भाई और शराब कारोबारी अनवर ढेबर की हिरासत अवधि को कोर्ट ने बढ़ा दिया है। ईडी ने बुधवार को मनी लॉन्ड्रिंग केस में रायपुर के होटल कारोबारी नितेश पुरोहित को भी गिरफ्तार किया था।
ईडी ने 14 दिन की मांगी थी रिमांड
जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम ने गुरुवार सुबह भिलाई स्थित शराब और होटल कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लन उर्फ पप्पू ढिल्लन के आवास पर छापा मारा था। उन्हें हिरासत में लेकर काफी देर तक पूछताछ की गई। इसके बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और रायपुर लेकर पहुंची। यहां पर पप्पू ढिल्लन को विशेष कोर्ट में पेश किया गया है। ईडी ने उनकी 14 दिन की रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने चार दिन की दी है। ईडी का दावा है कि, शराब घोटाले में पप्पू ढिल्लन की भी भूमिका है और इसके सबूत मिले हैं।
होटल कारोबारी की तबीयत बिगड़ी
दूसरी ओर ईडी की टीम ने बुधवार दोपहर को रायपुर के होटल कारोबारी नितेश पुरोहित को गिरफ्तार किया था। ईडी की ओर से अदालत को बताया गया था कि अनवर ढेबर के अवैध संचालन के बारे में पुरोहित जानते थे और आईएएस अनिल टुटेजा और एक अन्य व्यक्ति की इस पूरे मामले में मदद करते थे। फिलहाल गिरफ्तार किए जाने के बाद ही कारोबारी नितेश पुरोहित की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उनका उपचार चल रहा है। इस मामले में अनवर ढेबर पकड़े गए पहले व्यक्ति थे।
अनवर ढेबर की हिरासत पांच दिन बढ़ाई गई
रायपुर मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर की चार दिन की रिमांड बुधवार को खत्म हो गई। इसके बाद पीएमएलए कोर्ट में उनकी रिमांड अवधि को पांच दिन के लिए बढ़ा दिया है। उनके वकील राहुल त्यागी ने कहा कि कोर्ट ने जांच एजेंसी को निर्देश दिया है कि आरोपी को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए। अदालत ने एजेंसी को यह भी निर्देश दिया है कि आरोपी को किसी तरह की यातना या उत्पीड़न दिया गया है या नहीं, यह पता लगाने के लिए पूछताछ की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को संरक्षित की जाए।