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सीजी: सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में कुलदीप साहू समेत चार दोषी करार, 8 अक्तूबर को सुनाई जाएगी सजा

Mon, 28 Sep 2026 08:55 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर

सार

सूरजपुर के चर्चित दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के मामले में कुलदीप साहू समेत चार आरोपियों को दोषी करार दिया। चारों को 8 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी।
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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल 8 अक्टूबर को चारों दोषियों की सजा का ऐलान करेंगे।

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जघन्य हत्या और दुष्कर्म का मामला
यह मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। जांच के दौरान मामले में दुष्कर्म की भी पुष्टि हुई थी। आरोपियों ने मां-बेटी की हत्या के बाद दोनों के शव कार में रखे और कुछ दूरी पर स्थित खेत में निर्वस्त्र अवस्था में फेंक दिया था। वारदात के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

चार आरोपी दोषी करार
फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई करीब दो साल तक चली। न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर चार आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया। दोषियों में मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके, फूल सिंह उर्फ रिंकू और आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी शामिल हैं। अदालत इन चारों को 8 अक्टूबर को सजा सुनाएगी।
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पुलिसकर्मियों को कुचलने की कोशिश में 10 साल की सजा
घटना की रात मुख्य आरोपी कुलदीप साहू ने सूरजपुर थाने के सामने तैनात पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने का प्रयास भी किया था। इस मामले में अदालत ने कुलदीप साहू को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई है।

इसके अलावा पुलिस वाहन पर फायरिंग के मामले में कुलदीप साहू, नीलकेश्वर साहू और सूरज साहू के खिलाफ मामला दर्ज था। इस मामले में अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने और संदेह का लाभ देते हुए तीनों को दोषमुक्त कर दिया।

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