महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट के मुख्य आरोपी और फरार मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान में हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, भारतीय जांच एजेंसियों के अनुरोध पर जारी इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने कुछ सप्ताह पहले उसे पकड़ा था। अब भारत सरकार उसे प्रत्यर्पण (Extradition) या डिपोर्टेशन (Deportation) के जरिए वापस लाने की प्रक्रिया में जुटी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर कथित तौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया के एक देश के पासपोर्ट का इस्तेमाल कर यात्रा कर रहा था। इससे पहले वह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई में रह रहा था। वर्ष 2024 में भी यूएई अधिकारियों ने उसे हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया था।
ED का दावा- 6 हजार करोड़ का सट्टा नेटवर्क
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक, महादेव बेटिंग ऐप एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क है, जिसके जरिए करीब 6,000 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क में छत्तीसगढ़ के कुछ प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
दुबई से चलता था पूरा नेटवर्क
ईडी के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और उसका सहयोगी रवि उप्पल दुबई से पूरे बेटिंग सिंडिकेट का संचालन करते थे। यह नेटवर्क Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में अवैध सट्टेबाजी संचालित करता था। अलग-अलग राज्यों में फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत इसके पैनल और शाखाएं संचालित की जाती थीं।
1,700 करोड़ की संपत्ति जब्त
मार्च 2026 में ईडी ने सौरभ चंद्राकर और उससे जुड़ी कंपनियों की करीब 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच करने की जानकारी दी थी। इनमें दुबई स्थित कई महंगी संपत्तियां भी शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि इनमें बुर्ज खलीफा में निवेश से जुड़ी संपत्तियां भी शामिल हैं।
13 गिरफ्तार, 74 आरोपी
महादेव ऐप मामले की जांच के दौरान ईडी अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। रायपुर की विशेष PMLA कोर्ट में दाखिल पांच चार्जशीट में 74 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, अनिल अग्रवाल उर्फ अतुल और शुभम सोनी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए भी अदालत में आवेदन दिया गया है।
जूस की दुकान से शुरू हुआ सफर
जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर वर्ष 2019 में दुबई जाने से पहले भिलाई में अपने भाई के साथ 'जूस फैक्ट्री' नाम से जूस की दुकान चलाता था। बाद में वह कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग कारोबार से जुड़ गया।
भारत सरकार अब ओमान के साथ कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सौरभ चंद्राकर को जल्द भारत लाने की कोशिश कर रही है, ताकि महादेव बेटिंग ऐप मामले की आगे की जांच और न्यायिक कार्रवाई की जा सके।