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छत्तीसगढ़: रायगढ़ में मौत के मुहाने से लौटे पांच मासूम, गंभीर सर्पदंश के मामलों में जिंदगियां बचाई गईं

Wed, 08 Jul 2026 08:21 PM IST
रायगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
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रायगढ़ में 5 बच्चों को मिली नई जिंदगी
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय में स्थित रायगढ़ मेडिकल कालेज में सर्पदंश के गंभीर मामलों में अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे पांच मासूमों को विशेषज्ञ डाक्टरों ने नई जिंदगी दी है। नाजुक हालत में अस्पताल पहुंचे इन बच्चों की गंभीर हालत देखकर परिजनों की उम्मीद टूटने लगी थी। लेकिन डाक्टरों के प्रयास और मेहनत के अलावा आधुनिक चिकित्सा सुविधा की वजह से ये सभी बच्चे स्वस्थ होकर घर लौटे चुके हैं।

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मिली जानकारी के अनुसार, लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति चिकित्सालय रायगढ़ ने विषैले सर्पदंश से जूझ रहे पांच बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें नया जीवन दिया है। रायगढ़ मेडिकल कालेज के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग तथा पीआईसीयू में भर्ती पांचों बच्चों में चार न्यूरोटॉक्सिक तथा एक हेमोटॉक्सिक सर्पदंश का मामला था। इनमें तीन करैत, एक कोबरा और एक वाइपर के दंश से पीड़ित थे। सभी को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जहां तत्काल आपातकालीन उपचार शुरू किया गया। सबसे संवेदनशील मामला धरमजयगढ़ के दो सगे भाइयों 7 वर्षीय वीर कुमार और 12 वर्षीय लोकेश राठिया का था। 1 जुलाई की रात सोते समय दोनों को करैत ने गर्दन पर काट लिया। सुबह तक दोनों में गंभीर न्यूरोपैरालिटिक विषाक्तता विकसित हो चुकी थी और उनकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई थी।

इसी प्रकार सक्ती जिले के हसौद निवासी 7 वर्षीय मंजू को कोबरा ने पैर में काट लिया था, जिससे पैर में गंभीर सूजन और फफोले बन गए। वहीं रायगढ़ के 5 वर्षीय हितेश ढंगर को वाइपर के दंश से रक्तस्राव और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो गई थी। कलमी निवासी 7 वर्षीय हर्षित प्रजापति को भी सोते समय करैत ने काट लिया था, जिससे उसे गंभीर न्यूरोटॉक्सिक विषाक्तता हो गई।
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विशेष निगरानी में हुआ इलाज
अस्पताल पहुंचने पर अधिकांश बच्चों में पलकें झुकना, बोलने और निगलने में कठिनाई, मांसपेशियों में कमजोरी तथा श्वसन विफलता जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे थे। तीन बच्चों को तत्काल पीआईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। वाइपर दंश से पीड़ित बालक में रक्तस्राव एवं कोगुलोपैथी की स्थिति को विशेषज्ञ निगरानी में नियंत्रित किया गया। सभी मरीजों को आवश्यकता अनुसार 50 वायल तक एंटी-स्नेक वेनम, आधुनिक गहन चिकित्सा, निरंतर मॉनिटरिंग और आवश्यक जांचों के साथ चौबीसों घंटे उपचार उपलब्ध कराया गया।

समय पर उपचार से बची जान
अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने बताया कि विषैले सर्पदंश जैसे गंभीर मामलों में समय पर एंटी-वेनम, वेंटिलेटर सुविधा और प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम की उपलब्धता से पाँचों बच्चों की जान बचाई जा सकी। उन्होंने बताया कि सभी उपचार एवं आवश्यक दवाएं आयुष्मान योजना के अंतर्गत पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।

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