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कारखाना अधिनियम उल्लंघन पर कार्रवाई: रायगढ़ के चार उद्योग दोषी करार, श्रम न्यायालय ने लगाया 8 लाख का जुर्माना

Mon, 13 Jul 2026 06:54 PM IST
रायगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़

सार

रायगढ़ जिले के चार उद्योगों में कारखाना अधिनियम 1948 के उल्लंघन पर श्रम न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराते हुए कुल 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों और श्रमिक सुविधाओं में अनियमितताएं मिलने पर उद्योग प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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उद्योगों पर लगाए गए जुर्माने - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में चार उद्योगों पर कारखाना अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए श्रम न्यायालय ने कुल 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इन उद्योगों में मेसर्स एनआर इस्पात, जिंदल पावर लिमिटेड, मित्तल स्टोन क्रशर और अंजनी स्टील लिमिटेड शामिल हैं। रायगढ़ कलेक्टर के निर्देश पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं।

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निरीक्षण के दौरान कारखाना अधिनियम 1948 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया। इसके बाद संबंधित कारखाना प्रबंधन के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर श्रम न्यायालय रायगढ़ में प्रस्तुत किए गए थे। जून माह में इन प्रकरणों की सुनवाई के बाद श्रम न्यायालय ने उद्योग प्रबंधन को दोषी पाया और उन पर अर्थदंड लगाया।

उद्योगों पर लगाए गए जुर्माने
उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि मेसर्स एन.आर. इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड पर 1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। यह प्रकरण औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा 27 अप्रैल को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। मेसर्स जिंदल पावर लिमिटेड पर 8 जुलाई 2025 को दायर प्रकरण में 3 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। मेसर्स मित्तल स्टोन क्रशर पर 12 जून 2024 को दर्ज मामले में 1 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
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अंजनी स्टील लिमिटेड पर दो मामले
मेसर्स अंजनी स्टील लिमिटेड के विरुद्ध दो अलग-अलग मामलों में न्यायालय ने कारखाना प्रबंधन को दोषी मानते हुए क्रमशः 2 लाख रुपये और 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। ये दोनों प्रकरण 30 जुलाई 2025 और 20 फरवरी को श्रम न्यायालय में प्रस्तुत किए गए थे।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी अस्वीकार्य
उप संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, रायगढ़ ने यह भी बताया कि श्रमिकों को सुरक्षित और मानक अनुरूप कार्य वातावरण उपलब्ध कराना उद्योग प्रबंधन की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। कारखाना अधिनियम 1948 के अंतर्गत निर्धारित सुरक्षा मानकों, श्रमिक सुविधाओं और कार्य परिस्थितियों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

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