लॉज में पति-पत्नी बनकर रूके
इसके बाद वह आराधना को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाकर विभिन्न स्थानों से होते हुए सक्ति ले गया। सक्ति में उन्होंने एक लॉज में कमरा किराए पर लिया, जहां लोकनाथ ने रजिस्टर में अपना नाम और आराधना के नाम को बदलकर निमा पत्नी के रूप में दर्ज कराया।
शादी की बात पर हुआ दोनों के बीच विवाद
उसी रात शादी की बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। अगली सुबह 11 मई को वे सक्ति से खरसिंया, आमापाली होते हुए तुमीडिही के जंगल पहुंचे। जंगल में लोकनाथ ने आराधना की गला घोंटकर हत्या कर दी। पूंजीपथरा पुलिस ने अपराध क्रमांक 108/2026 के तहत धारा 103(1) और 238 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी लोकनाथ पटेल को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जंगल में ले जाकर की हत्या
लोकनाथ ने बताया कि जंगल में आराधना ने उससे प्यार करने की बात कही। इसके बाद उसने पीछे से उसका गला एक मिनट तक दबाया, जिससे आराधना बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। फिर उसने एक पत्थर से उसके सिर और कनपटी पर चार-पांच बार जोर से वार किए। इसके बाद उसने चाकू से आराधना के जबड़े, मुंह, नाक और गले के आगे-पीछे काटा। चाकू गर्दन में ही फंसा रह गया।
सबूत मिटाने का प्रयास
हत्या के बाद लोकनाथ ने आराधना के कपड़े उतारकर वहीं फेंक दिए। उसने उसके सैंडल भी रास्ते में फेंक दिए। घटना के बाद लोकनाथ ने आराधना के कंधे और कमर पर एक बड़ा पत्थर रखकर शव को दबा दिया। निरीक्षक रामकिंकर यादव ने लोकनाथ पटेल का बयान दर्ज किया, इस दौरान भुवनेश्वर बंद गोस्वामी और फूलसिंह यादव गवाह के तौर पर मौजूद थे।