छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पिता-पुत्र के बीच मामूली बात पर हुए विवाद के बाद पिता ने धारदार टांगी मारकर अपने ही पुत्र की निर्मम हत्या दी। इस मामले में अपर सत्र न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश ने आरोपी पिता को आजीवन कारावास और जुर्माने से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि 20 जुलाई 2019 की रात साढ़े 10 बजे मृतक गोपाल मांझी की पत्नी गोंदाबाई मांझी ने पत्थलगांव थाना में सूचना देते हुए बताया कि उसके पति गोपाल मांझी और उसके ससुर रतीराम का आपस में झगड़ा हो रहा था। दोनों पिता-पुत्र लड़ते हुए रात एक बजे घर से निकल गए।
कुछ देर पश्चात रतीराम घर आकर बताया कि उसने अपने बेटे गोपाल को हुड़ार झरखा के पास बहुत मार दिया है। कहकर घर से भाग गया। इसके बाद जब गोंदा बाई अपने चाचा ससुर अनिल मांझी के साथ मौके पर पहुंची तो देखा कि गोपाल मांझी बेहोशी की हालत में पड़ा था, चेहरे में कई जगह चोट के निशान थे। जिसमें खून बह रहा था।
इस घटना के बाद तत्काल 108 की मदद से गोपाल को पत्थलगांव अस्पताल लेकर पहुंचे जहां प्रारंभिक उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई। पत्थलगांव अस्पताल से मर्ग डायरी रैरूमा चौकी पहुंचने पर उपनिरीक्षक धनीराम राठौर ने आरोपी रतीराम माझी 45 साल, निवासी ससकोबा, रैरूमाचैकी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए टांगी से वारदात को अंजाम देने की बात कही। जिसके बाद आरोपी के खिलाफ धारा 302 भा.दं.सं. के तहत अपराध दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया गया।
अपर सत्र न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने प्रकरण में सुनवाई करते हुए सभी साक्षियों का बयान दर्ज किया गया इस दौरान अभियुक्त रतीराम मांझी को अपने ही बेटे की हत्या करने का दोषी पाया गया जिसके बाद आरोपी के खिलाफ धारा 302 के तहत आजीवन कारावास के अलावा एक हजार के अर्थदण्ड से दंडित किया है। अर्थदण्ड न पटाने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगताने को आदेश में कहा गया है। इस मामले में अपर लोक अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने पैरवी की।