मानवाधिकार संगठन ने FIR की मांग की
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सांसद कंगना रनौत की जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं और Gen-Z युवाओं को लेकर की गई कथित टिप्पणी के विरोध में राजधानी रायपुर में शिकायत दर्ज कराई गई है। मानवाधिकार न्याय सुरक्षा संगठन ने सिविल लाइन थाना पहुंचकर ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व प्रदेश सचिव महिला कांग्रेस पूनम पांडेय के नेतृत्व में थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सांसद द्वारा सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंच पर दिए गए कथित बयान में प्रदर्शन कर रहे युवाओं और Gen-Z पीढ़ी के लिए अपमानजनक एवं अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे युवाओं और छात्र-छात्राओं की गरिमा को ठेस पहुंची है।
संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि द्वारा प्रदर्शनरत युवाओं के लिए कथित रूप से आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग समाज में गलत संदेश देने के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विपरीत है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के बयान से किसी वर्ग की गरिमा प्रभावित होती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। संगठन ने पुलिस से उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
पूनम पांडेय ने कहा कि संगठन ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला तो संगठन न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई।