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आदिवासी वोट बैंक पर छिड़ी सियासी जंग: मुख्यमंत्री साय का कांग्रेस पर हमला; विक्रांत भूरिया ने किया पलटवार

Thu, 27 Aug 2026 02:37 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ में आदिवासी अधिकारों और कल्याण को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ में आदिवासी अधिकारों और कल्याण को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। वहीं, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
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मुख्यमंत्री साय ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा सरकार ने आदिवासी समाज के विकास और कल्याण को हमेशा प्राथमिकता दी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासियों के विकास के लिए अलग से अनुसूचित जनजाति मंत्रालय बनाया गया था।

साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं का लाभ आदिवासी समाज को मिल रहा है। इनमें विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए शुरू की गई PM-JANMAN योजना भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार आदिवासी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए लगातार काम कर रही है।
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विक्रांत भूरिया का पलटवार
मुख्यमंत्री के आरोपों पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने आदिवासी समाज के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया। भूरिया ने मुख्यमंत्री साय से आदिवासी समाज से माफी मांगने की मांग भी की। भूरिया रायपुर स्थित राजीव भवन में आयोजित आदिवासी कांग्रेस कार्यकारिणी और ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने आरक्षण के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक समानता हासिल होने तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी। 

उन्होंने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था ऐतिहासिक अन्याय और भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। जब तक समाज में असमानता और भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण को खत्म करने की बात उचित नहीं होगी। इस तरह आदिवासी समाज के मुद्दों को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी ने प्रदेश की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।
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