पीएलएफआई नक्सली संगठन के नाम पर एक करोड़ रुपये की लेवी मांगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए जशपुर पुलिस ने पवन लोहरा (निवासी मान्हु, खूंटी, झारखंड) को गिरफ्तार कर लिया है।
पीएलएफआई नक्सली संगठन के नाम पर एक करोड़ रुपये की लेवी मांगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए जशपुर पुलिस ने पवन लोहरा (निवासी मान्हु, खूंटी, झारखंड) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी अपने फरार साथी के साथ मिलकर व्हाट्सएप पर फिलीपींस के एरिया कोड (+63) का इस्तेमाल कर सरकारी विभाग के लेखापाल समेत 10-12 लोगों को धमकी भरे पत्र भेज चुका था।
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कैसे खुला मामला?
21 जनवरी 2025 को 59 वर्षीय लेखापाल ने थाना बगीचा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि सुबह 8 बजे उनके मोबाइल पर PLFI नक्सली संगठन के पार्टी अध्यक्ष के नाम से व्हाट्सएप पर एक पत्र आया। इसमें 1 करोड़ रुपये की लेवी मांगी गई थी और रकम न देने पर "फौजी कार्यवाही" की धमकी दी गई थी।इस रिपोर्ट पर IPC की धारा 308(3), 351(2) और छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम की धारा 8(1), 8(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस की रणनीति और गिरफ्तारी
जशपुर के SSP शशि मोहन सिंह ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए SDOP बगीचा दिलीप कोसले के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की और साइबर यूनिट को भी जांच से जोड़ा। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि व्हाट्सएप मैसेज फिलीपींस के +63 कोड से भेजे गए थे और इसे "जंगी ऐप + टर्बो वीपीएन" के जरिए हॉटस्पॉट से ऑपरेट किया जा रहा था। आईपी एड्रेस ट्रैक करने पर इसका लोकेशन मान्हु, जिला खूंटी (झारखंड) में मिला। इसके बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी पवन लोहरा को गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में पवन लोहरा ने कबूल किया कि वह अपने साथी के साथ मिलकर PLFI नक्सली संगठन के नाम पर फर्जी लेवी मांगने का खेल कर रहा था। अब तक 10-12 लोगों को इसी तरह धमकी देकर पैसे वसूलने की कोशिश की जा चुकी थी। आरोपी के कब्जे से 2 मोबाइल और सिम कार्ड जब्त किए गए। फिलहाल पुलिस इसके फरार साथी की तलाश कर रही है। इस केस की विवेचना और आरोपी की गिरफ्तारी में SDOP बगीचा दिलीप कोसले, निरीक्षक रामसाय पैंकरा, स.उ.नि. नरेश मिंज, प्र.आर. विशाल गुप्ता, आरक्षक मुकेश पांडेय, समीर टोप्पो और साइबर सेल के उपनिरीक्षक नसरुद्दीन अंसारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि "गिरफ्तार आरोपी से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इनका तरीका साइबर फ्रॉड जैसा है, जो नक्सली संगठन के नाम पर लोगों को डराकर पैसे ऐंठने का काम करता था। मामले की बारीकी से जांच की जा रही है और इसके साथी की तलाश जारी है।