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बस्तर दशहरा में संगीत और नृत्य का जादू: लालबाग में पवनदीप, चेतना और जनजातीय नृत्यों ने रचा मनोरम समां

Wed, 08 Oct 2025 04:26 PM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर

सार

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा लोकोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार की शाम लालबाग मैदान दर्शकों के लिए यादगार साबित हुई। इस भव्य सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड संगीत और बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।
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लालबाग मैदान में पवनदीप और चेतना की प्रस्तुति ने मंत्रमुग्ध किया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा लोकोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार की शाम लालबाग मैदान दर्शकों के लिए यादगार साबित हुई। इस भव्य सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड संगीत और बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।
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शाम का सबसे बड़ा आकर्षण बॉलीवुड गायक पवनदीप और चेतना रहे। दोनों कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज और शानदार गायकी से मंच पर समां बांध दिया। पवनदीप राजन ने केवल गायन ही नहीं किया, बल्कि कई वाद्य यंत्रों का कुशल संचालन भी किया। उनके हाथ कभी गिटार, तो कभी ड्रम्स पर थिरकते दिखे, जिससे संगीत का मनमोहक समां बना। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली और कॉलेज के छात्रों के मनमोहक प्रदर्शन से हुई। स्वामी विवेकानंद स्कूल के छात्रों ने सरस्वती मंगलाचारण से माहौल को भक्तिमय बनाया, जबकि बिहू (आसामी), समूह नृत्य (ओड़िआ) और वायनाड केरल ट्रायबल डांस जैसी रंगारंग प्रस्तुतियाँ दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचती रहीं।

बस्तर की सदियों पुरानी जनजातीय परंपरा मंच पर जीवंत हो उठी। लामकेर और कल्लूराम के नेतृत्व में गेड़ी नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें कलाकारों ने बाँस के डंडों पर संतुलन बनाते हुए तेज ताल और लय के साथ समूह नृत्य किया। पारंपरिक परिधान, ऊर्जा से भरे कदम और शानदार समन्वय ने दर्शकों को बस्तर की मिट्टी और संस्कृति से गहराई से जोड़ा।
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दरभा विकासखंड के छिंदावाड़ा से आए महादेव और उनके साथियों ने धुरवा नाच प्रस्तुत किया। पारंपरिक परिधानों और ढोल-मांदर की थाप पर उनका लयबद्ध प्रदर्शन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। इसी तरह, कलचा हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों ने गौर नृत्य प्रस्तुत कर बस्तर की आदिवासी संस्कृति का गौरव दर्शाया।

शाम का सबसे प्रेरणादायक प्रदर्शन सक्षम कलेक्टिव बैंड का था। दिव्यांग बच्चों से बने इस बैंड ने गिटार, कीबोर्ड और गायन के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह समूह दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और गिटारवाला संस्था द्वारा आयोजित विशेष म्यूजिक वर्कशॉप्स के माध्यम से तराशा गया है। उनका यह जीवंत प्रदर्शन दर्शाता है कि प्रतिभा और हौसला किसी भी शारीरिक सीमा के मोहताज नहीं होते। लालबाग की यह सांस्कृतिक संध्या न केवल संगीत और नृत्य प्रेमियों के लिए यादगार रही, बल्कि बस्तर की जनजातीय कला और लोक संस्कृति की जीवंतता का अद्भुत प्रमाण भी बनी।
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