बागबहारा नेत्रकांड पर विधानसभा में विपक्ष ने जोरशोर से हंगामा किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। विधानसभा में बुधवार को कांग्रेस सदस्यों ने इस मामले में लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा करने और प्रभावितों को दस-दस लाख रूपये मुआवजा देने की मांग की। साथ ही दोषियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने भी मांग की।
स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल की अनुपस्थिति के चलते विपक्ष ने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे पर बैठक लेने की बजाय स्वास्थ्य मंत्री विदेश चले गए हैं। साथ ही राज्य सरकार पर संवेदनहीन होने का भी आरोप लगाया। विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिश ने स्थगन प्रस्ताव को बाद में अस्वीकार कर दिया।
प्रश्नकाल शुरू होने पर कांग्रेस विधायक परेश बागबाहरा ने यह मामला उठाया और बताया कि बागबाहरा के नेत्र शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान 12 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। उन्होंने प्रश्नकाल रोक कर चर्चा कराने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष के चर्चा के लिए अनुमति न देने पर कांग्रेस सदस्य नारेबाजी करने लगे। तब हंगामे के कारण सदन कार्यवाही को पांच मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। कार्यवाही दुबारा शुरू होने पर स्वास्थ्य मंत्री के न होने पर संसदीय कार्यमंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार की ओर से जवाब दिया।
मामला यह है कि बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 9 व 10 दिसंबर को कृष्णा मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा शासन के सहयोग से 145 मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए गए। इनमें से चार मरीजों ने आंखों में दर्द की शिकायत की। 12 मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण पाया गया, उन्हें एमजीएम अस्पताल भेजा गया। ऑपरेशन किए गए 12 मरीजों की एक आंख की रोशनी चली गई है। तीन मरीजों का उपचार चल रहा है। सरकार ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं।