रायपुर जिले में इन दिनों खनिज विभाग में कर्मचारियों की कमी के चलते उत्खनन में अनियमितताएं बेधड़क चल रही हैं।
केवल दो माईनिंग इस्पेक्टरों के भरोसे ही 42 मिट्टी खदान, 4 फर्शों खदान और 226 चूना पत्थर खदानों में अनियमितता की जांच छोड़ी गई है।
उत्खनन में चल रही अनियमितताओं और माईनिंग इंस्पेक्टरों की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने विभाग को कई शिकायत पत्र भी लिखे हैं। लेकिन विभाग इन पर गौर करने के बजाए माइनिंग इंस्पेक्टरों को बढ़ावा दे रहा है।
खनिज इंस्पेक्टर रहे राजेश मालवे की असिस्टेंट माइनिंग अफसर के पद पर पदोन्नति के बाद रायपुर के आरंग, अभनपुर व गरियाबंद जिले की जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं, संजय शर्मा को असिस्टेंट माईनिंग अफसर बनाकर आरंग व अभनुपर क्षेत्र से हटाकर, धरसींवा, तिल्दा रायपुर का प्रभार दे दिया गया है।
दो स्थानों के प्रभार देख रहे राजेश मालवे अपने आरंग व अभनपुर क्षेत्र को माईनिंग इस्पेक्टर संदीप नायक के भरोस छोड़कर ज्यादातर गरियाबंद के दौरे पर ही रहते हैं। इससे क्षेत्र के खनिज माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए हैं।
बाहना काडी एवं धनसुली गावों में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलता है। यहां पर क्रेशर व चुना पत्थर उत्खनन करने वाली फार्मों द्वारा देर रात तक ब्लास्टिंग की जाती है।
जबकि खनिज अधिनियम के तहत इसके लिए एक समय सीमा और दायरा निर्धारित है।
इसी तरह धरसींवा तिल्दा रायपुर के कुछ क्षेत्रों में भी सहायक खनिज अधिकारी संजय शर्मा की टीम द्वारा की गई कार्रवाई संतोषजनक नहीं है।
माईनिंग इस्पेक्टर कुमार मंडावी द्वारा भी धनसुली (तिल्दा) की 23 चुनापत्थर की खदानों पर कोई विशेष कारर्वाई होने के संकेत नहीं है।