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छत्तीसगढ़: स्कूल में नहीं हैं शिक्षक…परेशान दृष्टि एवं श्रवण बाधित बच्चे बस्तर में सड़क पर उतरे

Tue, 13 Oct 2026 03:07 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

बस्तर स्थित आड़ावाल के शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधित स्कूल में शिक्षकों की कमी से नाराज विद्यार्थियों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। पहले ज्ञापन देने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। बच्चों ने जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।
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दृष्टि एवं श्रवण बाधित बच्चे बस्तर में सड़क पर उतरे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के आड़ावाल में स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधित स्कूल के विद्यार्थियों ने मंगलवार को शिक्षकों की कमी के विरोध में प्रदर्शन किया। लंबे समय से अध्यापकों की तैनाती न होने से परेशान बच्चे पढ़ाई ठप होने के कारण स्कूल परिसर छोड़कर सीधे सड़क पर उतर आए। वे जल्द से जल्द नए शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग कर रहे थे।
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लंबे समय से बनी हुई है समस्या
आड़ावाल के इस विशेष विद्यालय में शिक्षक न होने से बच्चों का अध्ययन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। छात्र-छात्राएं अपनी इस परेशानी को लेकर पहले भी आवाज उठा चुके हैं। विद्यार्थियों ने कुछ समय पूर्व जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक तैनात करने का अनुरोध किया था। इसके बाद भी प्रशासन और संबंधित विभाग ने समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला। लंबे इंतजार के बाद भी जब स्थितियां नहीं सुधरीं, तो विद्यार्थियों का असंतोष बढ़ गया और वे आंदोलन का रास्ता चुनने को विवश हो गए।

सड़क पर उतरे नाराज विद्यार्थी
विद्यार्थियों के अचानक सड़क पर उतरकर विरोध जताने से विद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही स्कूल के अन्य शिक्षक तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चों को शांत कराने और समझा-बुझाकर वापस परिसर के भीतर लाने का प्रयास शुरू कर दिया।
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विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की शिक्षा में अध्यापकों का मार्गदर्शन बेहद अहम होता है। दृष्टि एवं श्रवण बाधित बच्चों के लिए उनकी विशेष जरूरतों के अनुसार पठन-पाठन और संवाद की व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। ऐसे में विद्यालय में अध्यापकों की कमी दूर कर पढ़ाई की नियमित व्यवस्था बनाना जरूरी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मसले पर कितनी शीघ्रता से ध्यान देता है और स्कूल में शिक्षकों की तैनाती के लिए क्या कदम उठाता है।
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