छुईखदान में पान अनुसंधान केन्द्र की स्थापना
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परंपरागत पान खेती को पुनर्जीवित करने की दिशा में अहम पहल करते हुए खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला के विकासखण्ड छुईखदान में पान अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गई है। यह केन्द्र रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय परिसर में संचालित होगा।
छुईखदान क्षेत्र में पहले बड़े पैमाने पर पान की खेती होती थी, लेकिन तकनीकी मार्गदर्शन की कमी और गुणवत्तापूर्ण प्लांटिंग मटेरियल उपलब्ध न होने के कारण यह फसल धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ गई। वर्ष 2023-24 में राज्य शासन ने इस पारंपरिक फसल को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की घोषणा की थी, जिसे अब अमलीजामा पहनाया गया है।
पान उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए शेडनेट हाउस निर्माण पर 50 प्रतिशत विभागीय अनुदान दिया जा रहा है। वर्तमान में 7 किसानों ने 500-500 वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस तैयार किए हैं। प्रत्येक किसान को उद्यानिकी विभाग की ओर से 1.77 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया है। इनमें से 6 किसान सक्रिय रूप से पान की खेती कर रहे हैं।
शेडनेट संरचना के जरिए किसान प्रतिकूल मौसम में भी नियंत्रित वातावरण में पान उगा सकेंगे, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार की संभावना है। गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने के लिए कृषि महाविद्यालय के सहयोग से शासकीय उद्यान रोपणी कुकुरमुड़ा और बीरूटोला में प्रदर्शन प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर स्वस्थ एवं प्रमाणित पौध सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
जिला प्रशासन इस पहल की नियमित मॉनिटरिंग कर रहा है। कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। कृषि महाविद्यालय के विशेषज्ञ किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं, ताकि पान की खेती को दोबारा लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा सके।