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देश का सबसे बड़ा नक्सल ऑपरेशन: नक्सलियों का शीर्ष नेता बसव राजू मारा गया; डेढ़ दशक तक बस्तर में मचाया था आतंक

Wed, 21 May 2025 07:10 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर

सार

Naxalite Basav Raju killed in encounter: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ इलाके में अब तक के सबसे बड़े नक्सल ऑपरेशन में फोर्स को बड़ी सफलता मिली है।
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ग्राफिक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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Naxalite Basav Raju killed in encounter: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ इलाके में अब तक के सबसे बड़े नक्सल ऑपरेशन में फोर्स को बड़ी सफलता मिली है। डीआरजी जवानों और नक्सलियों के बीच करीब 50 घंटे से ज्यादा समय तक चली एनकाउंटर में डेढ़ करोड़ रुपये का इनामी 70 वर्षीय खूंखार नक्सली नंबाला केशव राव उर्फ अलियास बसवराजू मारा गया। इस बात की पुष्टि खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ पुलिस ने की है। उसके मारे जाने से नक्सली संगठन की नींव हिल गई है। नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि वह नक्सलियों के संगठन का शीर्ष लीडर था। उसे नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू उर्फ बीआर दादा उर्फ गगन्ना भी कहते थे। 
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नवंबर 2018 में नक्सल संगठन की संभाली कमान 
छह फीट ऊंचे इस खूंखार नक्सली की बात करें तो नवंबर 2018 में नक्सली गणपति के बाद बसवराजू को नक्सल संगठन की कमान सौंपी गई थी। वह नक्सल संगठन का महासचिव, पोलित ब्यूरो का सदस्य और केंद्रीय समिति का सदस्य था। कई लेयर में उसकी सुरक्षा व्यवस्था रहती थी। उसकी सुरक्षा में आधुनिक हथियारों से लैस तीस से चालीस माओवादी हमेशा साथ में रहते थे। नक्सली गणपति के बाद वह नक्सल संगठन की कमान संभाल रहा था। उसे माओवादियों के मिलिट्री ऑपरेशन का प्रमुख भी बनाया गया था।


बीटेक की पढ़ाई के बाद थामा नक्सली संगठन का साथ
साल 2017 से ही बसवराजू पूरे संगठन को मुलापल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति की जगह लीड कर रहा था। खुफिया एजेंसी को उसके बारे में सिर्फ ये पता था कि उसका जन्म आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम में जुलाई 1955 में हुआ था। पढ़ाई में मेधावी बसवराजू ने वारंगल रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक की डिग्री ली थी। वह इंजीनियर के साथ ही स्पोर्ट्स मैन भी था। कॉलेज के दिनों में वह वॉलीबाल में आंध्रप्रदेश को नेशनल चैंपियनशिप में रिप्रजेंट किया था।
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बसवराजू ने बीटेक की पढ़ाई की थी। उसके बाद लेफ्ट पार्टी में सक्रिय हुआ। एबीवीपी के कुछ सदस्यों से टकराव के बाद उसे साल 1980 में गिरफ्तार किया गया था। बसवराजू की गिरफ्तारी का यही एक दस्तावेज है। इसके बाद उसने सीपीआई (एम) की पीपुल्सवार यूनिट को ज्वॉइन किया और तब यानी लगभग 35 साल से वह बस्तर में सक्रिय नक्सली बना रहा। डेढ़ दशक पहले वह छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की सबसे बड़ी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीएसजेडसी) का चीफ कमांडर रहा।




 नक्सलियों के मिलिट्री डिवीजन का चीफ कमांडर रहा
फोर्स के पास बसवराजू को लेकर जो इंटेलिजेंस इनपुट हैं उसके मुताबिक, वह डेढ़ दशक पहले नक्सलियों के मिलिट्री डिवीजन का चीफ कमांडर था। तब गणपति नक्सलियों को लीड कर रहा था। बताया जाता है कि साल 2018 में नक्सली गणपति के बीमार होने पर बसवराजू ने पूरे संगठन की कमान संभाली थी। हालांकि नक्सलियों की ओर से इसकी अधिकृत घोषणा 10 नवंबर 2018 को जारी प्रेस रिलीज में की गई थी। 

 

बस्तर में डेढ़ दशक से नक्सल आतंक का पर्याय
बसव राजू पिछले करीब डेढ़ दशक से नक्सल आतंक का पर्याय बना हुआ था। वह ज्यादातर अबूझमाड़ में ही रहता था। उसके ऊपर अलग-अलग राज्यों में 2 करोड़ 2 लाख रुपए का इनाम था। उस पर फोर्स पर नृशंस हमला करने, एम्बुश लगवाने के लिये जाना जाता था। ताड़मेटला कांड और झीरम कांड की रणनीति बनाने में उसकी अहम भूमिका थी। ताड़मेटला कांड में सीआरपीएफ के 76 जवान वीरगति को प्राप्त हो गये थे। वहीं झीरम कांड में छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन का एक शीर्ष नेतृत्व ही पूरी तरह से खत्म हो गया था। जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, उदय मूदलियार, महेंद्र कर्मा, पूर्व गृहमंत्री नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, योगेंद्र शर्मा समेत कई कांग्रेस नेता मारे गये थे। 
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तलाश में थी 16 राज्यों की पुलिस
इसके अलावा बसव राजू नक्सली संगठन को हथियार सप्लाई कराने और नक्सल रणनीति बनाने में माहिर था। बताया जाता है कि उसकी तलाश में 16 राज्यों की पुलिस लगी हुई थी। उसे जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिये फोर्स लगातार सर्चिग कर रही थी पर सफलता नहीं मिल रही थी। आखिरकार आज 21 मई 2025 को फोर्स को उसे मार गिराने में बड़ी कामयाबी मिली है। चार जिलों यानी दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और कोंडागांव से डीआरजी के जवानों को नक्सल इलाके में भेजा गया। इसी दौरान नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच जमकर मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में वह 27 नक्सलियों के साथ ढेर हो गया। 
 
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