ऑपरेशन से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि कोबरा-204 इकाई को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए नक्सलियों ने डेढ़ किलोमीटर लंबे क्षेत्र में जाल बिछा रखा था। नक्सलियों ने चारों तरफ से फ़ायरिंग शुरू कर दी। हर एक नक्सली ने पेड़ को अपनी ढाल बनाया हुआ था। तीन घंटे से भी ज्यादा समय तक मुठभेड़ चली।
पांच बार ऐसे भी मौके आए जब लगा कि नक्सली भाग गए हैं। जैसे ही कोबरा इकाई चौकसी से आगे कदम बढ़ाती, तुरंत गोलियां बरसनी शुरू हो जाती। चूंकि जवानों की संख्या भी कम थी और उनके पास गोला-बारूद व हथियार भी एक तय मात्रा में ही थे, इसलिए अंधाधुंध तरीके से नक्सलियों की तरह फायरिंग भी नहीं करनी थी।
कोबरा इकाई के कई जवान जो कि ग्रेनेड और यूबीजीएल से लैस थे, उन्होंने अपनी व्यूहरचना से करीब एक किलोमीटर तक का रास्ता साफ करा दिया।ढाई घंटे की मुठभेड़ के बाद नक्सलियों को लगने लगा कि अब भागने के अलावा दूसरा चारा नहीं है। तब तक छत्तीसगढ़ पुलिस की एसटीएफ भी मौक़े पर पहुंच चुकी थी।
मुठभेड़ में कोबरा टीम के पांच सदस्य भी घायल हो गए। आईजी संजय अरोड़ा ने संभावना जताई है कि इस मुठभेड़ में कम से कम डेढ़ दर्जन से ज्यादा नक्सलियों को भारी चोट पहुंची है। चूंकि नक्सली अपने साथियों के शव मुठभेड़ स्थल पर नहीं छोड़ते, इसलिए अभी तक कोई शव बरामद नहीं हुआ है। कोबरा और एसटीएफ द्वारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है।