छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। कोर क्षेत्र में अवैध शिकार में संलिप्त तीन शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 को ध्यान में रखते हुए बढ़ाई गई निगरानी और गश्त के दौरान की गई।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 15 जनवरी 2026 को दक्षिण उदंती परिक्षेत्र के नागेश बीट में नियमित गश्त के दौरान छह सशस्त्र संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधि देखी गई। एंटी पोचिंग टीम ने तत्काल घेराबंदी कर राजमन यादव को मौके से हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपने साथियों के साथ प्रतिबंधित कोर क्षेत्र में अवैध रूप से डेरा डालने और शिकार करने की बात कबूल की।
जांच में सामने आया कि 16 जनवरी 2026 को गोमारझरी नाले के पास पानी पीने आए जंगली सुअरों का शिकार किया गया था। शिकार के बाद मांस को टांगापानी गांव ले जाकर आपस में बांट लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी।
गरियाबंद पुलिस के सहयोग से 20 जनवरी 2026 को मुख्य आरोपी गुप्ताराम को भूतबेड़ा बाजार से गिरफ्तार किया गया। उसके घर की तलाशी में एक भरमार बंदूक, करीब 3.100 किलोग्राम जंगली सुअर का मांस, भालू का पंजा और शिकार में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण बरामद किए गए। वहीं, आरोपी भादुराम के घर से वन्यजीवों को फंसाने वाले फंदे और क्लच वायर जब्त किए गए। रिकॉर्ड जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पेशेवर शिकारी हैं और मुख्य आरोपी के खिलाफ पूर्व में भी वन्यजीव अपराध के प्रकरण दर्ज हैं। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को 22 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरियाबंद के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 13 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
वन विभाग ने बताया कि इस मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। क्षेत्र में गश्त और निगरानी और अधिक सख्त कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में संकटग्रस्त एशियाई जंगली भैंसों और बाघों के संरक्षण के लिए विशेष प्रजनन केंद्र, एंटी स्नेर वॉक अभियान और सामुदायिक सहभागिता जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। हाल ही में पेरेग्रीन फाल्कन जैसे दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी ने भी इस क्षेत्र के बेहतर पारिस्थितिक तंत्र की पुष्टि की है।