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महासमुंद में ही उलझे जोगी, क्या जीत पाएंगे?

Sat, 12 Apr 2014 11:35 AM IST
हरीश लखेड़ा/महासमुंद (रायपुर)
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जोड़तोड़ में माहिर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए इस बार महासमुंद की चुनावी जंग आसान नहीं दिख रही है। उन्हें एक ओर रमन सिंह से निबटना है तो दूसरी तरफ यूपीए सरकार के खिलाफ बेलगाम महंगाई व भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे हैं, जिनका बोझ उठाना जोगी के लिए मुश्किल हो रहा है।
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नतीजतन जोगी अपने ही क्षेत्र में उलझ कर रह गए हैं। महासमुंद में भी चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा जा रहा है। यहां जोगी का मुकाबला भाजपा के मौजूदा सांसद चंदूलाल साहू से है, लेकिन यहां चुनाव मैदान में उनके अलावा 10 और चंदूलाल साहू भी ताल ठोक रहे हैं। यहां आम चर्चा है कि इन सभी चंदूलालों को मैदान में उतारने के पीछे जोगी का ही हाथ है।

जोगी की इस सियासी चाल की काट भाजपा को नहीं मिल पाई है। आदिवासी सतनामी समाज से आने वाले जोगी को लोगों ने 2004 में लोकसभा भेजा था, हालांकि तब मतदान से ठीक दो दिन पहले दुर्घटना में जोगी बुरी तरह से घायल हो गये थे और माना जाता है कि उसी सहानुभूति का लाभ उन्हें मिला।
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तीन जिलों महासमुंद, गरियाबंद और धमतरी में फैले महासमुंद संसदीय क्षेत्र में इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। भाजपा के साहू के पक्ष में यह बात भी है कि यहां की सातों विधानसभा सीटें भाजपा के पास हैं।

जोगी की उम्मीदवारी घोषित होने पर यहां शुरू में तो कांग्रेस खेमे में भारी उत्साह दिखा, लेकिन चुनाव प्रबंधन का जिम्मा बाहरी लोगों को सौंप देने से स्थानीय कार्यकर्ता खुश नहीं हैं। बड़े कांग्रेस नेता पहले से जोगी के खिलाफ रहे हैं, जबकि महंगाई व भ्रष्टाचार के मुद्दों पर कांग्रेस की देशभर में पतली हालत के चलते भी जोगी की परेशानी बढ़ी है।

जोड़तोड़ में माहिर जोगी इस बार भी अपने पुराने तौर तरीकों को अजमाने लगे हैं। यही वजह है कि वे भाजपा के स्थानीय स्तर के कई छोटे नेताओं का कांग्रेस में शामिल करा चुके हैं। लेकिन भाजपा ने भी यहां से वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल साहू को अपने में शामिल कर जोगी को उन्हीं की भाषा में जवाब दे दिया है।
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