लक्ष्मणेश्वर मंदिर को छत्तीसगढ़ का काशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि रावण के संहार के बाद लक्ष्मण जी ने रामचंद्र जी से इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। मंदिर के गर्भगृह में लक्ष्मण जी द्वारा स्थापित लक्ष्यलिंग मौजूद है। इस मंदिर को लखेश्वर महादेव भी कहा जाता है क्योंकि इसमें एक लाख लिंग मौजूद हैं।
इस मंदिर में एक पातालगामी लक्ष्य छिद्र है जिसमें जितना भी जल डाला जाए वह उसमें समाहित हो जाता है। इन छिद्रों में एक ऐसा छिद्र भी है जिसमें हमेशा जल भरा रहता है। इसे अक्षय कुंड कहते हैं।
छत्तीसगढ़ में लखेश्वर महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा जाता है कि भगवान राम ने इस जगह खर और दूषण नाम के राक्षसों का संहार किया था इसलिए यह जगह खरौद ने नाम से मशहूर हुई।