बीजापुर जिला अस्पताल में आंख फोड़वा कांड को लोग अब तक भूल नहीं पाए हैं। अब कोरबा जिले में भी एक ऐसी ही घटना सामने आ गई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन होने के बाद बुजुर्ग महिला की एक आंख में गंभीर इंफेक्शन फैल गया। जिससे महिला देख पाने में लाचार है। डॉक्टरों ने उसे आनन-फानन में इलाज के लिए रायपुर रेफर कर दिया। जहां तीन दिनों तक चले इलाज के बाद भी सुधार नहीं हो सका। अब पीड़िता और उसके परिजनों को रायपुर व कोरबा के बीच चक्कर काटना पड़ रहा है। जिससे पीड़िता और परिजनों को मानसिक परेशानी तो हो रही है, घर की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण आर्थिक परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा है।
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब रविवार को बुजुर्ग महिला, बद्रिका बाई (60 वर्ष), को मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रायपुर एम्स रेफर किया गया। पीड़िता और उसके परिजनों ने अपनी आपबीती सुनाई। कोरबा-चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित ग्राम बरपाली के निवासी कौशल दास वैष्णव अपनी पत्नी बद्रिका बाई के साथ रहते हैं। पिछले चार साल से बद्रिका बाई को दोनों आंखों से कम दिखाई दे रहा था।
जांच के लिए दंपत्ति एक दिसंबर को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र रोग विभाग पहुंचे। डॉक्टरों ने निरीक्षण के बाद बताया कि बद्रिका बाई की आँखों में मोतियाबिंद है और दाहिनी आँख का ऑपरेशन कराने की सलाह दी। तीन दिसंबर को ऑपरेशन किया गया। अस्पताल में ही भर्ती रहने के दौरान, ऑपरेशन के दूसरे दिन जब आँख की पट्टी खोली गई, तो बद्रिका बाई को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। उन्होंने तुरंत परिजनों और डॉक्टरों को सूचित किया। डॉक्टरों ने उन्हें आश्वासन दिया कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद मरीज को रायपुर रेफर कर दिया गया। रायपुर के एक निजी अस्पताल में तीन दिनों तक उपचार चला, लेकिन जब कोई फायदा नहीं हुआ, तो रायपुर के डॉक्टरों ने मरीज को वापस मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोरबा भेज दिया। यहाँ जनरल वार्ड (महिला) के बेड नंबर 31 में रखकर इलाज किया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। अंततः, एक बार फिर उन्हें रायपुर रेफर किया गया है।
पीड़िता के पति कौशल दास ने कहा, "जीवन भर अपनी आँखों से दुनिया देख सकें, इसी उम्मीद से ऑपरेशन कराया था, लेकिन अब आँख से दिखाई देना ही बंद हो गया है। अब हमें रायपुर और कोरबा के बीच भागदौड़ करनी पड़ रही है, जिससे मानसिक परेशानी तो हो रही है, साथ ही आर्थिक समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।"
यह भी आरोप लगाया गया है कि नियमों को ताक पर रखकर बुजुर्ग महिला को संजीवनी एक्सप्रेस से रायपुर रवाना किया गया और सरकारी अस्पताल की बजाय रायपुर के श्री रेटिना केयर सुपरस्पेशलिटी आई हॉस्पिटल भेजा गया।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करतला से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें सुनीता दास नामक महिला का नसबंदी के बाद तबीयत बिगड़ गई थी। आरोप था कि उसे इलाज के लिए सरकारी डॉक्टर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ हालत नाजुक हो गई थी। आला अधिकारियों के संज्ञान में आने पर पीड़िता की तबीयत तो ठीक हुई, लेकिन विभाग से अब तक सहायता राशि नहीं मिल सकी है।