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कोरबा: पत्नी को मौत के घाट उतारकर सेप्टिक टैंक में डाला, दोषी को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

Tue, 26 Aug 2025 05:22 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

अपनी मां को साथ रखने की बात पर विवाहिता का विवाद पति से हो गया। पति ने विवाद बढ़ने पर डंडा से वार कर पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। उसके शव को सेप्टिक टैंक में डाल दिया। 
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कोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपनी मां को साथ रखने की बात पर विवाहिता का विवाद पति से हो गया। पति ने विवाद बढ़ने पर डंडा से वार कर पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। उसके शव को सेप्टिक टैंक में डाल दिया। साथ ही थाना पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज करा दी। जब भाई बहन की जानकारी लेने उसके घर पहुंचा तो जीजा की करतूत उजागर हो गई। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। मामले में करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद दोषी को आजीवन कारावास व अर्थदंड से दंडित किया गया है। यह फैसला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने दिया है।

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विशेष लोक अभियोजक सुनील सोनवानी ने बताया कि घटना बालको थानांतर्गत ग्राम रूमगरा में घटित हुई थी। यहां रवेंद्र कुमार राजपूत 37 वर्ष अपनी पत्नी बुधवारा बाई के साथ निवास करता था। बुधवारा बाई रहस्यमयढंग से लापता हो गई थी। जिसकी जानकारी उसकी मां मिलन बाई ने 18 जुलाई 2022 की रात अपने पुत्र राजू राजपूत को दी। राजू 19 जुलाई की सुबह बहन के संबंध में जानकारी लेने उसके घर रूमगरा पहुंचा। जहां सेप्टिक टैंक के ऊपर रखे लकड़ी को देख राजू को संदेह हुआ। उसने लकड़ी हटाकर देखा तो सेप्टिक टैंक के नीचे उसकी बहन बुधवारा

अपनी मां को साथ रखने की बात पर विवाहिता का विवाद पति से हो गया। पति ने विवाद बढ़ने पर डंडा से वार कर पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। उसके शव को सेप्टिक टैंक में डाल दिया। साथ ही थाना पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज करा दी। जब भाई बहन की जानकारी लेने उसके घर पहुंचा तो जीजा की करतूत उजागर हो गई। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। मामले में करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद दोषी को आजीवन कारावास व अर्थदंड से दंडित किया गया है। यह फैसला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने दिया है।
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विशेष लोक अभियोजक सुनील सोनवानी ने बताया कि घटना बालको थानांतर्गत ग्राम रूमगरा में घटित हुई थी। यहां रवेंद्र कुमार राजपूत 37 वर्ष अपनी पत्नी बुधवारा बाई के साथ निवास करता था। बुधवारा बाई रहस्यमयढंग से लापता हो गई थी। जिसकी जानकारी उसकी मां मिलन बाई ने 18 जुलाई 2022 की रात अपने पुत्र राजू राजपूत को दी। राजू 19 जुलाई की सुबह बहन के संबंध में जानकारी लेने उसके घर रूमगरा पहुंचा। जहां सेप्टिक टैंक के ऊपर रखे लकड़ी को देख राजू को संदेह हुआ। उसने लकड़ी हटाकर देखा तो सेप्टिक टैंक के नीचे उसकी बहन बुधवार। की लाश मिली। सूचना मिलने पर पुलिस ने मृतिका के पति रवेंद्र कुमार राजपूत से पूछताछ की तो मामले का खुलासा हो गया। दरअसल बुधवारा अपनी मां को साथ रखना चाहती थी। 

इस बात से उसके पति यानि रवेंद्र को एतराज था। इसी बात को लेकर पति पत्नी के बीच विवाद हो गया। रवेंद्र ने विवाद बढ़ने पर तेंदू की लाठी से ताबड़तोड़ हमला कर पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। उसके शव को सेप्टिक टैंक में फेंककर खुद थाना पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज करा दी। मामले पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश कर दिया। मामले की सुनवाई प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य के न्यायालय में चल रही थी।

सुनवाई के दौरान 17 साक्षियों का कथन कराया गया। इसके साथ ही तत्कालिन थाना प्रभारी विजय चेलक की बेहतर विवेचना और गवाहों को समय पर समंस तामिल कराने मे कोर्ट मोहर्रिर नितेश मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई। जिससे आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषसिद्ध हो गया। कोर्ट ने दोषी को हत्या के मामले में आजीवन कारावास तथा पांच हजार जुर्माना और साक्ष्य छिपाने के मामले में एक साल की सजा और पांच सौ रूपए अर्थदंड से दंडित किया है। दोषी को अर्थदंड अदा नही करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी।

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