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बर्खास्त होमगार्ड आत्महत्या कोशिश मामला: 'दोषी अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज करो', धरने पर बैठे नगर सेना के जवान

Tue, 27 Jan 2026 01:54 PM IST
कोरबा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच कोरबा कलेक्ट्रेट परिसर में नगर सेना (होमगार्ड) के बर्खास्त जवान ने बर्खास्तगी और कथित मानसिक प्रताड़ना से आहत होकर कीटनाशक का सेवन कर आत्महत्या की कोशिश की। जिसके बाद अब घटना के विरोध में नगर सेना के अन्य जवान नगर सेना कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी तत्काल बहाली और अधिकारियों के खिलाफ केस करने की मांग कर रहे हैं।
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नगर सेना के जवानों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बर्खास्तगी से आहत नगर सेना के एक जवान द्वारा आत्महत्या की कोशिश के बाद मामला तूल पकड़ गया है। इस घटना के विरोध में नगर सेना के जवान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे नगरसेन कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर पीड़ित नगर सैनिक संतोष पटेल की तत्काल बहाली, जिला सेनानी का तबादला और दोषी अधिकारी जिला सेनानी अनुज एक्का के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

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जानकारी के अनुसार, पीड़ित नगर सैनिक संतोष पटेल ने कुछ दिन पहले कलेक्टर परिसर में जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। जहर सेवन के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई, जिसके चलते उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा में भर्ती कराया गया। स्थिति नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे रायपुर रेफर कर दिया, जहां उसका इलाज जारी है।
 

 

घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि संतोष पटेल ने जहर सेवन से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा था। इस नोट में उसने डिविजनल कमांडेंट और कोरबा कमांडेंट पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। जवान का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा लगातार दबाव और उत्पीड़न के कारण उसे यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

 

 

धरने पर बैठे नगर सेना के जवानों का कहना है कि जब तक संतोष पटेल को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी याद दिलाया कि कुछ दिन पहले ही जिला सेनानी के खिलाफ महिला सैनिकों ने भी प्रताड़ना को लेकर आंदोलन किया था।
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इससे विभाग के भीतर असंतोष की स्थिति पहले से ही बनी हुई है। इस मामले ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और नगर सेना के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित जवान को न्याय कब तक मिलता है।
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