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कोरबा: मानिकपुर और कुसमुंडा एसईसीएल के कर्मचारियों का घेराव, बोनस पर बनी सहमति, 8 और 15 अक्तूबर तक मिलेगा पैसा

Mon, 29 Sep 2025 05:49 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

कोरबा में एसईसीएल मानिकपुर और कुसमुंडा क्षेत्र में कार्यरत ठेका कामगारों ने बोनस की मांग को लेकर आज सुबह 5:00 बजे से काम का बहिष्कार कर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया।
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बोनस पर बनी सहमति - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरबा में एसईसीएल मानिकपुर और कुसमुंडा क्षेत्र में कार्यरत ठेका कामगारों ने बोनस की मांग को लेकर आज सुबह 5:00 बजे से काम का बहिष्कार कर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया कामगारों ने सुबह अपने वाहनों को खड़ा कर दिया और सुबह 9:00 बजे से एसईसीएल के मुख्य कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन शुरू किया।

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इस सफल आंदोलन के परिणामस्वरूप एसईसीएल प्रबंधन के अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता हुई वार्ता के बाद यह निर्णय लिया गया कि सभी ठेका कामगारों का बोनस और वेतन भुगतान उनके खाते में 8 अक्टूबर और 15 अक्टूबर तक जमा कर दिया जाएगा प्रबंधन इस संबंध में जल्द ही ऑफिस ऑर्डर जारी करेगा और सूचना पोर्टल पर भी प्रदर्शित किया जाएगा। भविष्य को ध्यान में रखते हुए, प्रबंधन और कामगार संगठनों के बीच यह भी तय हुआ है कि अगले साल से दशहरा से पूर्व ही सभी ठेका कामगारों को बोनस की राशि प्रदान कर दी जाएगी ।

इस अवसर पर ऊर्जाधानी भू-विस्थापित संगठन के अध्यक्ष, सपुरन कुलदीप ने मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि परमानेंट वर्कर और ठेका कामगारों के लिए समान काम, समान वेतन, समान बोनस और सभी सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन को और तेज करने की आवश्यकता है उन्होंने इस विषय पर जल्द ही एक वृहद बैठक बुलाने का आह्वान किया । श्रम सेवा भू-विस्थापित कामगार संगठन के संरक्षक, विजय महंत ने इस आंदोलन की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर हमारे इस आंदोलन का और विस्तार करना होगा उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस साल जो बोनस मिल रहा है, उसे आगामी वर्षों में नियम का हिस्सा बनाने के लिए प्रयास जारी रखना होगा ।
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संगठन के सदस्य अशोक पटेल ने प्रबंधन के साथ हुई वार्ता के सकारात्मक निर्णय की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि ठेका कामगारों के वेतन, भत्ता, मेडिकल और सामाजिक सुरक्षा जैसी अन्य मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। इस सफल धरना प्रदर्शन में एसईसीएल कुसमुंडा की आउटसोर्सिंग कंपनियों के अंतर्गत कार्यरत सैकड़ों की संख्या में ड्राइवर, हेल्पर, सुपरवाइजर सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे यह आंदोलन ठेका कामगारों की एकता और शक्ति का प्रतीक बन गया है ।

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