कोरबा में शुक्रवार को मुहर्रम श्रद्धा और अकीदत के साथ मनाया गया। शहर में मुहर्रम का माहौल भावुक रहा। धनवारपारा, कुचेना, बुधवारी, मुड़ापार सहित कई इलाकों से ताजिया जुलूस निकाले गए। हाथों में झंडे, अलम और ताजिया लिए अकीदतमंद 'या हुसैन' के नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। जगह-जगह लंगर और शरबत का वितरण किया गया।
इमाम हुसैन की याद में राहगीरों को शरबत पिलाया गया और भोजन परोसा गया। इंदिरा नगर-दुरपा रोड क्षेत्र में पिछले 40 वर्षों से लगातार लंगर वितरण की परंपरा इस बार भी निभाई गई। स्थानीय लोगों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर सहयोग किया।
शहर का पुराना बस स्टैंड मुहर्रम का मुख्य केंद्र बना। सभी मोहल्लों से निकले ताजिया जुलूस यहां एकत्रित हुए। श्रद्धालुओं ने फातेहा पढ़ी, दरूद-ओ-सलाम पेश किया और कर्बला की शहादत को याद कर शोक व्यक्त किया। पूरे शहर से जुटे लोगों ने एकजुट होकर अमन और भाईचारे का संदेश दिया।
मुहर्रम के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। दिनभर पुलिस बल शहर में गश्त करता रहा। संवेदनशील चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। बस स्टैंड पर सभी जुलूसों के एकत्रित होने के दौरान पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। ट्रैफिक डायवर्ट कर आम लोगों को असुविधा न हो, इसका भी ध्यान रखा गया। अधिकारी लगातार व्यवस्था की मॉनिटरिंग करते रहे।
मुहर्रम का संदेश केवल शोक तक सीमित नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने और इंसानियत की मिसाल कायम करने का है। कोरबा में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को शरबत पिलाकर और लंगर में शामिल होकर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। प्रशासन और नागरिकों के सहयोग से मुहर्रम का जुलूस शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
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