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Korba News: ज्ञानभारतम् मिशन को बड़ी सफलता, 400 साल पुरानी पांडुलिपियां मिलीं; डिजिटल संरक्षण शुरू

Sun, 24 May 2026 07:15 PM IST
कोरबा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

कोरबा में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दौरान 16वीं शताब्दी की 27 दुर्लभ पांडुलिपियां मिलीं। श्रीमद्भागवत पुराण समेत कई ऐतिहासिक ग्रंथों का डिजिटल संरक्षण किया गया।
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400 साल पुरानी पांडुलिपियां मिलीं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरबा में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ज्ञानभारतम् मिशन को बड़ी ऐतिहासिक सफलता मिली है। राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत कोरबा जिले में यह उपलब्धि हासिल हुई। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में यह सर्वेक्षण चल रहा था।

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23 मई 2026 को रानी सड़क पुरानी बस्ती स्थित राजगढ़ी में 16वीं शताब्दी की पांडुलिपि का पता चला। यह कल्चुरीकालीन लगभग 400 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि है। जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई हुई। कोरबा की अंतिम शासिका दिवंगत रानी धनराज कुंवर देवी के नाती कुमार रविभूषण प्रताप सिंह के निवास से कुल 27 प्राचीन पांडुलिपियां मिलीं। 

इनमें श्रीमद्भागवत पुराण और सुखसागर का बारहवां स्कंध प्रमुख है। सभी पांडुलिपियों को मौके पर ही 'ज्ञानभारतम् एप' के माध्यम से डिजिटल रूप में संरक्षित किया गया। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ इतिहासकार रमेंद्रनाथ मिश्र से चर्चा कर पांडुलिपियों के ऐतिहासिक स्वरुप की पुष्टि हुई। ये पांडुलिपियां दिवंगत रानी धनराज कुंवर देवी और दिवंगत जोगेश्वर प्रताप सिंह के पूर्वजों के पास पीढ़ियों से संरक्षित थीं।
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ये पांडुलिपियां मोटे पुराने कागज पर काली स्याही से देवनागरी और संस्कृत भाषा में लिखी हैं। वर्तमान में ये बेहद जर्जर अवस्था में हैं और छूने पर टूटने लगती हैं। इस कारण इन्हें लाल कपड़े में लपेटकर पूजा घर में रखा गया था। करीब 20 साल बाद पहली बार इन्हें खोला गया। राजपरिवार में इनका उपयोग धार्मिक आयोजनों में वाचन के लिए होता था।

सर्वेक्षण के दौरान उन्नीसवीं शताब्दी में कोलकाता से प्रकाशित स्कंध पुराण की लगभग 300 पृष्ठों की एक ऐतिहासिक प्रति भी मिली है। यह भी जर्जर हालत में थी, जिसका डिजिटल संरक्षण किया गया। ज्ञानभारतम् मिशन के माध्यम से इन दुर्लभ पांडुलिपियों का राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखीकरण हुआ है। डिजिटल रूप में संरक्षित ये धरोहरें भावी पीढ़ियों के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगी। प्रशासन अब जिले में निजी संग्रहों, मंदिरों और मठों में सर्वेक्षण तेज करेगा।

 

 

 

 

 

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