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Chhattisgarh: 51 जोड़ों का सामूहिक विवाह, कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों की बेटियों का भव्य कन्यादान

Thu, 07 May 2026 09:35 PM IST
कोरबा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

रायपुर के श्रीराम मंदिर परिसर में छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन द्वारा निःशुल्क सामूहिक कन्या विवाह समारोह आयोजित किया गया, जिसमें 51 जोड़ों ने वैदिक रीति-रिवाज से विवाह किया। कोरबा जिले के 5 जोड़े भी शामिल रहे। संगठन ने सभी नवविवाहित जोड़ों को पलंग, अलमारी, प्रेशर कुकर, बर्तन समेत घरेलू सामान और वस्त्र भेंट किए।
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निशुल्क सामूहिक कन्या विवाह समारोह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन ने रायपुर स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में निशुल्क सामूहिक कन्या विवाह समारोह आयोजित किया। यह आयोजन सामाजिक सेवा और मानवीय मूल्यों को समर्पित था। संगठन की इस अनुकरणीय पहल की सभी समाजों ने मुक्तकंठ से सराहना की।

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समारोह में पूरे प्रदेश से कुल 51 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। इनमें कोरबा जिले से 5 जोड़े शामिल थे। सभी विवाह वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुए। पूरे आयोजन स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया था। विवाह में पारिवारिक आत्मीयता और भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक दिखी। 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल उपस्थित रहे। बसना विधायक संपत अग्रवाल भी विशेष रूप से मौजूद थे। सिंधी, सिख, गुजराती, साहू और क्षत्रिय समाज के वरिष्ठजन भी शामिल हुए। सभी अतिथियों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
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प्रांतीय चेयरमैन अशोक मोदी ने बताया कि इस विशाल आयोजन की तैयारी तीन माह से चल रही थी। विवाह के लिए ऐसे जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का चयन किया गया। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल विवाह कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियां लाना है। कोरबा निवासी अशोक मोदी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है।

संगठन ने नवविवाहित दंपतियों को गृहस्थ जीवन हेतु कई वस्तुएं भेंट कीं। इनमें पलंग, गद्दा, रजाई, अलमारी, प्रेशर कुकर, घरेलू बर्तन और मिठाइयां शामिल थीं। वधुओं को पाजेब व बिछिया तथा वरों को शेरवानी, पगड़ी और दुपट्टा दिया गया। समारोह की सबसे भावुक विशेषता यह रही कि संगठन के पदाधिकारियों ने स्वयं माता-पिता की भूमिका निभाते हुए कन्यादान किया। मंगलगीत, भजन और पारंपरिक गीतों के साथ बेटियों की विदाई की गई, जिससे माहौल भावुक हो गया।

 

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