आखिरकार थक-हारकर घरवालों ने कॉलोनी वासियों की मदद से इसकी जानकारी जितेंद्र सारथी (स्नेक मैन) को दी। जिस पर सारथी ने थोड़ी देर में पहुंचने की बात कही। तब तक उस पर नजर रखने को कहा, फिर थोड़ी देर बाद टीम साडा कॉलोनी एनटीपीसी पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया। अजगर की पकड़ और मजबूत होती गई आखिरकार कार के सामने के चक्के को जैक लगाकर बाहर निकाला गया, जिससे रेस्क्यू करने में आसानी हुई और तब जाकर अजगर की पकड़ ढीली हुई और अजगर को बाहर निकाल पाने में कामयाबी मिली।
इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से थैले में डाला गया, फिर रेस्क्यू की जानकारी कटघोरा डीएफओ निशांत को दी। उनके निर्देशानुसार अजगर को जंगल में सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया। जितेंद्र सारथी और उनकी टीम को घर वालों ने रात में ठंड के बावजूद उनकी मदद करने के लिए शुक्रिया कहा। जितेंद्र सारथी ने बताया उनकी नोवा नेचर टीम कोरबा जिले में अपनी सेवाएं दे रही है। साथ ही वन्य जीवों को बचाने में लोकल कम्युनिटी के साथ काम कर रही है, लोगों से अपील की है कि इसमें हर एक व्यक्ति की भूमिका जरूरी हैं।