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Korba: भूविस्थापित ग्रामीणों का बड़ा एलान, कल करेंगे एसडीएम कार्यालय का घेराव; 16 से अधिक गांव के लोग प्रभावित

Tue, 19 May 2026 06:13 PM IST
कोरबा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के भूविस्थापित ग्रामीणों ने तहसील कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास जैसे कार्यों में रिश्वतखोरी व देरी से त्रस्त ग्रामीणों ने 20 मई को एसडीएम कार्यालय कटघोरा का घेराव करने का एलान किया है।
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गांवों के भूविस्थापितों का एलान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के भूविस्थापित ग्रामीणों ने तहसील कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया है। रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास और राजस्व त्रुटि सुधार जैसे कार्यों के लिए ग्रामीणों को दीपका, दर्री, कटघोरा तहसील और जिला पुनर्वास शाखा के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन कार्यालयों में सुनियोजित तरीके से रिश्वत ली जाती है।

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रिश्वत न देने पर उनके प्रकरण महीनों-सालों तक लंबित रखे जाते हैं। पूर्व में कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हैं। उन्होंने 20 मई यानी कल एसडीएम कार्यालय कटघोरा का घेराव करने का निर्णय लिया है। संबंधित कार्यालयों को इस संबंध में नोटिस भी भेजी जा चुकी है। 

एसईसीएल ने जटराज, पड़निया, सोनपुरी, पाली, रिसदी, खोडरी, चुरैल, आमगांव, खैरभावना, गेवरा सहित कई गांवों का अधिग्रहण किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन तिहार के दावों के विपरीत तहसील कार्यालय काम कर रहे हैं। ग्रामीण विधायक-सांसद की निष्क्रियता को भी दोषी मानते हैं, जिसके कारण अधिकारी बेलगाम हैं।
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एसईसीएल की नीतियों पर आपत्ति
एसईसीएल अधिग्रहित गांवों में भूमिहीन परिवारों को बसाहट की पात्रता नहीं दे रहा है। यह पीएम आवास योजना के भूमिहीनों को मुख्यधारा में लाने के लक्ष्य के खिलाफ है, जिससे ऐसे हितग्राही बेघर हो रहे हैं। एसईसीएल ने खोडरी, रिसदी और पड़निया में राजस्व शिविर लगाए थे। लेकिन इन शिविरों में केवल आवेदन लिए गए और निराकरण के लिए तहसील दीपका भेज दिया गया। ग्रामीण चाहते हैं कि शिविर में ही कार्रवाई हो ताकि उन्हें भ्रष्टाचार से बचाया जा सके।

मुआवजे और पक्षपात का मुद्दा
एसईसीएल ड्रोन सर्वे से संपत्ति का मूल्यांकन कर रहा है, जिस पर ग्रामीणों को कड़ी आपत्ति है। उनकी सहमति के बिना सर्वे कर मुआवजे में कटौती की जा रही है। जटराज गांव में 2010 में भूमि अर्जन के बाद आधे ग्रामीणों को मसाहती मानकर और आधे को नहीं मानकर पक्षपात किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। 20 मई को कुसमुंडा क्षेत्र के सभी अधिग्रहित गांवों के ग्रामीण कटघोरा में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

 

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