मुआवजा और रोजगार की मांग पर भू-विस्थापितों का आंदोलन
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आरोप है कि लाठीचार्ज के बाद घायल प्रदर्शन कर रहे लोगों को जबरन उठाकर थाने ले जाया गया। जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, तो वे भी बड़ी संख्या में दीपका थाना पहुंच गए। ग्रामीणों ने मारपीट और लाठीचार्ज का आदेश देने वाले सीआईएसएफ अधिकारियों पर अपराध दर्ज करने की मांग की। थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू ने घायलों का मुलाहिजा करवाने और उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के तानाशाह महाप्रबंधक के इशारे पर सीआईएसएफ द्वारा किया गया यह लाठीचार्ज निंदनीय है। उन्होंने कहा कि भू-विस्थापितों की समस्याओं का समाधान किए बिना किसी भी स्थिति में खदान विस्तार नहीं होने दिया जाएगा। अगर प्रबंधन ने जबरन विस्तार की कोशिश की तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। प्रशांत झा ने मांग की कि एसईसीएल से प्रभावित प्रत्येक छोटे खातेदार को नियमित रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि नए और पुराने मुआवजा प्रकरणों में की जा रही कटौती तत्काल बंद की जाए और विस्थापितों के साथ न्याय किया जाए।
किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, बावजूद इसके सीआईएसएफ ने जबरन लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा कि बंदूक और लाठी की नोंक पर खदान विस्तार नहीं होगा। पहले रोजगार, पुनर्वास और मुआवजा की समस्याओं का समाधान जरूरी है। किसान सभा ने कहा कि पूर्व में अधिग्रहित ग्रामों के रोजगार और मुआवजा प्रकरण अब तक लंबित हैं, जबकि प्रशासन की मदद से नए क्षेत्रों में तेजी से खनन विस्तार किया जा रहा है।
संगठन ने चेतावनी दी कि जब तक प्रभावित ग्रामों के रोजगार, बसावट और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक किसी भी नए विस्तार कार्य का विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन में गेवरा क्षेत्र के कई प्रभावित गांवों के सैकड़ों भू-विस्थापित शामिल हुए। किसान सभा के पदाधिकारी अब आगे की रणनीति तय करने में जुटे हैं और आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने की तैयारी कर रहे हैं।