फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरबा में ज्ञानभारतम अभियान: सीतामढ़ी की श्रीराम गुफा से मिलीं 14 दुर्लभ पांडुलिपियां, डिजिटल संरक्षण शुरू

Thu, 07 May 2026 11:41 AM IST
कोरबा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा

सार

भारत सरकार के ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत कोरबा की श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी से 14 दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियां मिली हैं। जिला प्रशासन ने इनका डिजिटल संरक्षण कर राष्ट्रीय अभिलेख में दर्ज कराया है।
 
विज्ञापन
श्रीराम गुफा से मिलीं 14 दुर्लभ पांडुलिपियां - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत कोरबा में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का सशक्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी से 14 अत्यंत दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। इनका डिजिटल संरक्षण कर राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखित किया गया है।
विज्ञापन


कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा इस महत्वाकांक्षी अभियान को गंभीरता से क्रियान्वित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटल संरक्षण तथा भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित संवहन सुनिश्चित करना है।

जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह की अगुवाई में ‘ज्ञानभारतम दूत’ युवा टीम कोरबा ने श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी में विस्तृत सर्वेक्षण किया। यह स्थल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ प्राचीन गुफाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं के कारण ऐतिहासिक महत्ता भी रखता है। सर्वेक्षण में 14 दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुईं।
विज्ञापन


जिला समन्वयक ने बताया कि मंदिर के पुजारी दुकालू श्रीवास ने इन पांडुलिपियों को श्रद्धा एवं सावधानी से वर्षों से सुरक्षित रखा है। ये पांडुलिपियां उन्हें पिता मातादीन श्रीवास से प्राप्त हुई थीं, जिन्हें उनके पूर्वजों द्वारा सहेजा गया था। इस प्रकार यह अनमोल धरोहर पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है।

अध्ययन में पता चला कि इनमें ओड़िया भाषा का प्रयोग है। लिपि के गोलाकार अक्षरों को ‘मुंडिया’ कहा जाता है। प्राचीन काल में ताड़पत्रों पर लेखन के दौरान उनकी संरचना बचाने के लिए गोलाकार अक्षरों का विकास किया गया था। इनका कालखंड 15वीं से 19वीं शताब्दी के मध्य का माना जा रहा है। दोनों पक्षों पर लेखन अंकित है, जो उस काल की लेखन शैली दर्शाता है।

जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने पुजारी दुकालू श्रीवास को मोमेंटो, शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। युवा टीम ने इन पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण कर ‘ज्ञानभारतम ऐप’ में अपलोड किया।

इस अवसर पर कमला नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर, डॉ. सुशीला कुजूर, विकास पांडे सहित युवा टीम के शिवराज थवाईत, मानुप्रताप श्रीवास, राज कुरी, खुशबू दिनकर समेत अन्य उपस्थित रहे।
विज्ञापन


 

 

 

 

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें