छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में पुलिस ने एक विशेष अभियान में नौ संदिग्ध माओवादियों के मारे जाने का दावा किया है। मारे जाने वालों में से एक संदिग्ध नक्सली की पहचान ताती भीमा के रूप में की गई है।
पुलिस का कहना है कि ताती भीमा छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के प्रशिक्षकों के प्रमुख थे। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के दो जवान भी मारे गए हैं। सुकमा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने बताया कि सोमवार की सुबह सुरक्षाबलों की टीम विशेष अभियान 'ऑपरेशन प्रहार-4' के लिए निकली हुई थी, जहां साकलेर के जंगलों में नक्सलियों के साथ उनकी मुठभेड़ हुई।
छत्तीसगढ़ में नक्सल मामलों के विशेष पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी के अनुसार, "रविवार को सुकमा जिले के एसपी अभिषेक मीणा के नेतृत्व में ऑपरेशन प्रहार-4 लॉन्च किया गया था। इसमें एसटीएफ, सुकमा जिले की डीआरजी, सीआरपीएफ़ की कोबरा की टीम, तेलंगाना की स्पेशल टीम और ग्रे हाउंड के 150 जवानों समेत सुरक्षाबलों के लगभग 1200 लोगों ने ऑपरेशन प्रहार में हिस्सा लिया।"
अवस्थी ने बताया कि इस विशेष अभियान को सीपीआई माओवादी के बटालियन नंबर-1 के क्षेत्र सालेतोंग, बड़े केडवाल और साकलेर के इलाक़े में चलाया गया था, जहां सुबह डीआरजी की टीम का सामना माओवादियों से हुआ।
हथियार फेंके जाने की सूचना
डीएम अवस्थी ने दावा किया कि मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से 8 संदिग्ध माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा एक अन्य स्थल से एक संदिग्ध माओवादी का शव बरामद किया गया।
पुलिस के अनुसार इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों को एक तालाब में भारी मात्रा में हथियार फेंके जाने की ख़बर मिली थी। जिसके बाद दोपहर में इस तालाब में तलाशी अभियान शुरू किया गया लेकिन माओवादियों ने फिर से सुरक्षाबलों पर हमला बोला, जिसमें डीआरजी के दो जवान मारे गए। इसके बाद सुरक्षाबलों ने तलाशी का काम बंद किया।
शाम पांच बजे के आसपास वायु सेना की मदद से सुरक्षाबलों को सुरक्षित स्थान पर लाने की कवायद शुरू की गई। वायु सेना के हेलिकॉप्टर से संदिग्ध माओवादियों के शव भी लाए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि मारे गए संदिग्ध माओवादियों में से दो की पहचान कर ली गई है। इनमें से एक सुकमा जिले के ही पोलमपल्ली की महिला पोडियम राजे है, जबकि दूसरे संदिग्ध माओवादी के शव की पहचान ताती भीमा के रूप में की गई है। पुलिस का दावा है कि दोनों माओवादियों पर 8-8 लाख रुपये का ईनाम था।